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    सारंडा में पुलिसिया दबिश से भागकर दलमा पहुंचे थे नक्सली, सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में किया गोला-बारूद जब्त

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 08:47 PM (IST)

    सारंडा में पुलिसिया दबिश के बाद दलमा पहुंचे नक्सलियों से सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए हैं। गिरफ्तार नक्सलियों की निशान ...और पढ़ें

    वन्यजीवों के लिए विख्यात दलमा पहाड़ पर कभी नक्सलियों की बंदूकें गूंजती थीं।

    वन्यजीवों के लिए विख्यात दलमा पहाड़ पर कभी नक्सलियों की बंदूकें गूंजती थीं।

    HighLights

    1. नक्सलियों से पूछताछ पर दलमा से हथियार बरामद।

    2. इंसास राइफल, एकेएम-47 की गोलियां और कोडेक्स वायर बरामद।

    3. सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से दलमा क्षेत्र हुआ सुरक्षित।

    दिलीप कुमार, चांडिल । प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और वन्यजीवों के लिए विख्यात दलमा पहाड़ पर कभी नक्सलियों की बंदूकें गूंजती थीं। अब उसी दलमा क्षेत्र में सुरक्षा बलों को नक्सलवाद के खिलाफ एक और बड़ी सफलता मिली है। 
     
    गिरफ्तार तीन हार्डकोर नक्सलियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत आसनबनी के पास दलमा पहाड़ से भारी मात्रा में आधुनिक हथियार और विस्फोटक बरामद किए हैं।
     

    इंसास राइफल, कारतूस और कोडेक्स वायर बरामद 

    सरायकेला-खरसावां जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) के अनुसार, नक्सलियों की निशानदेही पर चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान दलमा पहाड़ से एक मैगजीन लगी इंसास राइफल (जो पूर्व में पुलिस से लूटी गई थी), AKM-47 की 7.62 mm की 208 गोलियां और तीन बंडल कोडेक्स वायर बरामद किए गए हैं।  
     
    पुलिस ने पूरे सामान को जब्त कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। घने जंगलों में छिपाकर रखे गए इतने बड़े जखीरे की बरामदगी को सुरक्षा एजेंसियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
     

    सारंडा में दबिश के बाद दलमा को बनाया था ठिकाना 

    पूछताछ में गिरफ्तार नक्सलियों ने स्वीकार किया कि वे पूर्व में दलमा क्षेत्र में काफी सक्रिय रहे हैं। हाल ही में सारंडा क्षेत्र में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और छापेमारी के कारण वे दलमा की ओर भाग आए थे। 

    प्रकृति के साये में बना था नक्सलियों का पनाहगाह 

    उनका उद्देश्य इस क्षेत्र में किसी बड़ी घटना को अंजाम देकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना था। दलमा पहाड़ अपनी मनोरम वादियों, हरियाली और हाथियों के प्राकृतिक आवास के कारण देश-दुनिया से सैलानियों को आकर्षित करता है।
     
    हालांकि, दुर्गम रास्ते, घने जंगल और विशाल भौगोलिक बनावट के कारण नक्सलवाद के दौर में माओवादियों ने इसे अपना मजबूत सुरक्षा कवच बना लिया था।

    वे जंगल की गहराइयों में हथियार और विस्फोटक छिपाकर रखते थे। लेकिन अब सुरक्षा बलों की लगातार मुस्तैदी से दलमा धीरे-धीरे अपने खौफनाक अतीत को पीछे छोड़कर एक बार फिर अपनी पुरानी प्राकृतिक पहचान और सुरक्षित पर्यटन क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।

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