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    बलिदानी बजरंगी विश्वकर्मा के नाम पर त्रिपुरा में चौकी और यूपी में सड़क, नक्सलियों से मुठभेड़ में हुई थी शहादत

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 02:50 PM (IST)

    बलिदानी बजरंगी विश्वकर्मा का नाम त्रिपुरा में नक्सली मुठभेड़ में सर्वोच्च बलिदान देने के बाद अमर हो गया है। उनके सम्मान में त्रिपुरा में 'बजरंगी चौकी' ...और पढ़ें

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    मनोज सिंह, अंबेडकरनगर। नक्सलियों से मुठभेड़ में बलिदान हुए बजरंगी विश्वकर्मा का नाम आज भी त्रिपुरा में अमिट है। उनके नाम पर वहां रतियापाड़ा में बजरंगी चौकी बनाई गई है। प्रदेश सरकार ने यहां भी उनके सम्मान में बरियावन-टांडा मार्ग का नामकरण किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है। इस पर भव्य गेट बना है। गांव में स्मारक बनाकर बलिदानी की मूर्ति स्थापित की गई है। प्रति वर्ष बलिदान दिवस छह अगस्त को श्रद्धांजलि सभा आयोजित होती है।

    अकबरपुर तहसील के सुलतानपुर तुलसीपुर गांव के लाल बजरंगी विश्वकर्मा ने छह अगस्त 2010 को त्रिपुरा के नलकटा में नक्सलियों से लोहा लेते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनके अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए वर्ष 2011 में उन्हें मरणोपरांत राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। गांव में बनी उनकी समाधि, स्मारक और उनके नाम पर बने स्मृति द्वार आज भी हर आने-जाने वाले को उनकी वीरता की याद दिलाते हैं।

    एक जुलाई 1973 को जन्मे बजरंगी विश्वकर्मा चार भाइयों में सबसे छोटे थे। देश सेवा का सपना उन्हें दिल्ली ले गया, जहां से उनका चयन बीएसएफ में हुआ। सेवा के दौरान उन्होंने हर चुनौती का साहसपूर्वक सामना किया। इस घटना से वीर नारी सरोज विश्वकर्मा और तीन बच्चों अंशिका, ऋषभ व प्रियांशी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन पूरे क्षेत्र ने अपने वीर सपूत पर गर्व किया।

    बजरंगी के शौर्य को सम्मान देते हुए बीएसएफ की 101वीं बटालियन ने त्रिपुरा स्थित रतियापाड़ा चौकी का नाम बदलकर 'बजरंगी चौकी' रख दिया। उनके बड़े भाई प्रेम भवन ने बताया कि गांव के निकट स्थित स्मारक का निर्माण परिवार ने अपने संसाधनों से कराया है, जहां लोग आज भी श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचते हैं।

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    शासन ने बरियावन-टांडा मार्ग का नाम बलिदानी बजरंगी विश्वकर्मा के नाम पर रखने की स्वीकृति भी प्रदान की है। बरियावन चौराहे पर बना उनका स्मृति द्वार आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान की प्रेरणा दे रहा है।

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