सुरक्षा के कड़े पहरे और अपनों के आंसुओं के बीच पंचतत्व में विलीन हुए हिमांशु, फफक पड़े पापा
सरायकेला-खरसावां जिलाध्यक्ष हिमांशु सिंह की अंतिम यात्रा भारी सुरक्षा और आक्रोश के बीच निकली, जिससे पूरे कोल्हान क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। ...और पढ़ें

हिमांशु की अंतिम यात्रा में शामिल होने के दौरान फफक फफक कर रोते दादा।
HighLights
करणी सेना जिलाध्यक्ष हिमांशु सिंह की अंतिम यात्रा निकली।
भारी सुरक्षा के बीच पार्वती घाट पर अंतिम संस्कार।
जमशेदपुर-आदित्यपुर में तनाव, धारा 163 लागू।
जागरण टीम, जमशेदपुर/आदित्यपुर। औद्योगिक नगरी आदित्यपुर और जमशेदपुर का आसमान बुधवार को मानों आंसुओं और भारी आक्रोश की दोहरी धुंध से भीग गया।
पिछले 48 घंटों से जारी तनाव, तीखे गतिरोध और शोकाकुल माहौल के बीच करणी सेना युवा मोर्चा के सरायकेला-खरसावां जिलाध्यक्ष हिमांशु सिंह की अंतिम यात्रा निकली।
पुलिस की चौखट पर हुई इस नृशंस हत्या ने पूरे कोल्हान क्षेत्र में व्यवस्था के प्रति गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। कड़े सुरक्षा पहरे, भारी संख्या में तैनात पुलिस बल के बीच बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट पर 28 वर्षीय हिमांशु का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
बुधवार को जब शांतिनगर (हरिओम नगर) स्थित आवास पर हिमांशु का पार्थिव शरीर पहुंचा, तो पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। इस खामोशी को चीरती हुई परिजनों की हृदयविदारक चीत्कार से वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
अपने जवान पोते के शव को देखकर 80 वर्षीय दादा के बहते आंसुओं ने माहौल को और गमगीन कर दिया। जब घर की देहरी से अर्थी उठी, तो समर्थकों और स्थानीय निवासियों का हुजूम उमड़ पड़ा।
'हिमांशु अमर रहे' और 'पुलिस-प्रशासन हाय-हाय' के नारों के बीच विशाल शव यात्रा पार्वती घाट की ओर बढ़ी। जमशेदपुर से लेकर आदित्यपुर तक तनाव का आलम यह था कि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए प्रशासन को मानगो, साकची, बिष्टुपुर सहित छह प्रमुख थाना क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू करनी पड़ी थी।
चम्पाई सोरेन का फूटा गुस्सा, व्यवस्था को ठहराया जिम्मेदार
इस दुखद और तनावपूर्ण माहौल के बीच झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे। इस दौरान उनका दर्द और प्रशासनिक शिथिलता के प्रति भारी गुस्सा फूट पड़ा।
पार्वती घाट पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को सीधे कठघरे में खड़ा किया। चम्पाई सोरेन ने कड़े शब्दों में कहा कि जब कानून के रक्षक ही मूक तमाशबीन बन जाएं, तो उस राज में आम आदमी की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
पुलिस की मौजूदगी में, पीसीआर वैन से खींचकर सरेआम एक होनहार नौजवान को मौत के घाट उतार देना, एक ऐसा जघन्य अपराध है जो पुलिसिया व्यवस्था की घोर विफलता का सबसे विद्रूप चेहरा है।
सरकार की अब तक की कार्रवाई को पूरी तरह नाकाफी बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच और सभी नामजद आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की।
इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आगामी शुक्रवार को आहूत 'जमशेदपुर बंद' को अपना पूर्ण और स्पष्ट समर्थन देने का भी ऐलान किया।
प्रशासन की 'सीक्रेट' रणनीति से भड़का जनाक्रोश
हिमांशु की मौत के बाद प्रशासनिक स्तर पर की गई कुछ गलतियों ने आग में घी का काम किया। प्रशासन द्वारा मंगलवार की रात परिजनों की बिना सहमति के गुपचुप तरीके से शव का पोस्टमार्टम कराए जाने का प्रयास किया गया।
इस भनक के लगते ही करणी सेना के कार्यकर्ताओं और परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। परिवार ने साफ कह दिया कि जब तक लापरवाह अधिकारियों पर गाज नहीं गिरती और न्याय का लिखित भरोसा नहीं मिलता, वे शव को स्वीकार नहीं करेंगे।
अंततः प्रशासन को उग्र होते जनाक्रोश और परिजनों के अदम्य संकल्प के सामने झुकना पड़ा। लगातार कई दौर की मैराथन वार्ताओं और संवाद के बाद पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त ने पीड़ित परिवार को एक लिखित आश्वासन पत्र सौंपा।
इस समझौते के तहत मृतक की पत्नी को संविदा पर तत्काल नौकरी, भविष्य में स्थायी सरकारी नौकरी के लिए राज्य सरकार को अनुशंसा, लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट (स्पीडी ट्रायल) के जरिए मुकदमा चलाने की बात स्वीकार की गई। इस लिखित भरोसे के बाद ही परिजन अंत्येष्टि के लिए राजी हुए।
छावनी में तब्दील रहा शहर
वारदात के बाद से ही शहर में बने भारी तनाव को देखते हुए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह हाई अलर्ट मोड पर रहा। बुधवार को शव के पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार संपन्न होने तक किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा चक्र तैयार किया गया था।
बिष्टुपुर स्थित टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) से लेकर एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस तक भारी संख्या में जिला पुलिस, झारखंड आर्म्ड पुलिस (जैप-6) के जवान और दंडाधिकारियों को प्रतिनियुक्त किया गया था।
पोस्टमार्टम हाउस परिसर को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया था और बिना विशेष अनुमति के किसी भी बाहरी व्यक्ति या समर्थक को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा था।
टीएमएच के मुख्य प्रवेश द्वार पर भी सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस ने खरकाई पुल से लेकर एस-टाइप चौक तक मोर्चा संभाल रखा था।
कोल्हान रेंज के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा स्वयं पल-पल के घटनाक्रम की निगरानी कर रहे थे। वे एसएसपी कार्यालय में कैंप कर अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे।
वहीं दूसरी ओर सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह, धालभूम के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) अर्णव मिश्रा, सिटी एसपी ललित मीणा और ग्रामीण एसपी शुभम खंडेलवाल समेत दोनों जिलों के आला अधिकारी दिनभर सड़कों पर गश्त कर स्थिति का जायजा लेते रहे।
समझौते की मेज पर दिनभर जूझते रहे राजनीतिक सूरमा
शव के जबरन पोस्टमार्टम की कोशिशों के बाद बुधवार सुबह से ही हरिओम नगर में भारी हंगामा और नारेबाजी होती रही। आक्रोशित ग्रामीणों और समर्थकों के विरोध का सामना कई प्रशासनिक अधिकारियों को करना पड़ा।
स्थिति को नियंत्रण में लाने और गतिरोध को समाप्त करने के लिए धालभूम एसडीओ और सरायकेला उपायुक्त के साथ सरकार की तरफ से झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल षड़ंगी, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और मानगो की मेयर दिनभर वार्ता की मेज पर जूझते रहे।
सुबह 9 बजे से शुरू हुई यह खींचतान तब जाकर थमी, जब दोपहर बाद पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त राजीव रंजन खुद मौके पर पहुंचे और वार्ता की कमान संभाली।
इसके पूर्व, सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत कई वरिष्ठ भाजपा नेता भी हिमांशु के आवास पर पहुंचे और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस पूरे घटनाक्रम और पल-पल बदलती परिस्थितियों की जानकारी सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा रही थी।
यूं चला 15 घंटे का पल-पल का घटनाक्रम
- रात 02:30 बजे (मंगलवार): पूर्वी सिंहभूम प्रशासन के कुछ अधिकारी रात के सन्नाटे में गुपचुप तरीके से हरिओमनगर स्थित अरविंद सिंह के आवास पहुंचे। मंशा पोस्टमार्टम की सूचना देकर दबाव बनाने की थी। लेकिन दरवाजे पर चट्टान की तरह खड़े हिमांशु के 80 वर्षीय दादा टीपी सिंह ने ऐसा कड़ा प्रतिरोध किया कि पुलिसिया अमले को उल्टे पांव लौटना पड़ा।
- सुबह 07:00 बजे (बुधवार):पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ करणी सेना के कार्यकर्ताओं और मोहल्ले वासियों का हुजूम हिमांशु के दरवाजे पर उमड़ने लगा।
- सुबह 09:00 बजे:दोनों जिलों (पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां) का भारी पुलिस-प्रशासनिक अमला दलबल के साथ मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने दाह-संस्कार की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मिन्नतें कीं।
- सुबह 11:00 बजे: प्रशासनिक गतिरोध को तोड़ने के लिए दंडाधिकारी चंद्रजीत सिंह और सिटी एसपी ललित मीणा की मौजूदगी में सुलह की पहली आधिकारिक मेज सजी।
- दोपहर 12:00 बजे: पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास मौके पर पहुंचे। इसी दौरान पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता, मेयर सुधा गुप्ता, क्षत्रिय संघ के अध्यक्ष शंभू सिंह लंबी मंत्रणा की।
- दोपहर 03:00 बजे:पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त राजीव रंजन ने के साथ डीआईजी, सरायकेला उपायुक्त और धालभूम एसडीओ की मौजूदगी में परिजनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच निर्णायक बैठक शुरू हुई।
- शाम 04:00 बजे: प्रशासन को आखिरकार भारी जनाक्रोश के आगे झुकना पड़ा। दोनों पक्षों के बीच एक लिखित समझौता हुआ, जिसमें मृतक की पत्नी के लिए नौकरी की अनुशंसा की गई।
- शाम 04:50 बजे: समझौते पर हस्ताक्षर के बाद परिजन अस्पताल से शव लेने को राजी हुए।
- शाम 06:15 बजे: घर की चौखट से हिमांशु की अंतिम यात्रा बिष्टुपुर पार्वती घाट के लिए रवाना हुई।
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