विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

टाटा स्टील व टाटा मोटर्स को कर्जमुक्त कर नई उड़ान दी, 400 अरब डॉलर का समूह बनाने के बाद चंद्रशेखरन की विदाई

Published: Wed, 12 Aug 2026 04:50 PM (IST)

एन. चंद्रशेखरन ने घोषणा की है कि वे 20 फरवरी 2027 को अपना तीसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद टाटा ...और पढ़ें

टाटा स्टील के कार्यक्रम में एन चंद्रशेखरन और टीवी नरेंद्रन। (फोटो: फाइल)

टाटा स्टील के कार्यक्रम में एन चंद्रशेखरन और टीवी नरेंद्रन। (फोटो: फाइल)

HighLights

  1. चंद्रशेखरन 2027 में टाटा संस चेयरमैन पद छोड़ेंगे।

  2. उनके नेतृत्व में टाटा समूह 400 अरब डॉलर का बना।

  3. टाटा मोटर्स और टाटा स्टील का कायाकल्प किया।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अचानक अपनी विदाई की घोषणा कर कार्पोरेट जगत को चौंका दिया है। बुधवार को उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 20 फरवरी 2027 को अपना तीसरा कार्यकाल पूरा होने के बाद सेवा विस्तार नहीं लेंगे। साल 2017 के भारी विवाद और कर्ज के बीच कमान संभालने वाले चंद्रशेखरन ने अपने कार्यकाल में टाटा को 400 अरब डालर का महाकाय समूह बना दिया।

हालांकि, रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच उपजे नीतिगत मतभेदों ने उन्हें यह फैसला लेने पर मजबूर किया। जनवरी 2017 में जब एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस की कमान संभाली, तब समूह चौतरफा संकटों से घिरा था।

साइरस मिस्त्री विवाद के कारण कार्पोरेट प्रशासन पर सवाल उठ रहे थे। समूह की कई कंपनियां भारी कर्ज में डूबी थीं और भविष्य की कोई स्पष्ट रणनीतिक दिशा नहीं थी। ऐसे मुश्किल समय में चंद्रशेखरन ने फिटनेस फर्स्ट (पहले सेहतमंद बनें) का मंत्र अपनाया।

यह उनके कड़े आर्थिक अनुशासन का ही नतीजा था कि वित्तीय वर्ष 2020 में समूह का कुल राजस्व जो करीब 7.89 लाख करोड़ रुपये था, वह वित्तीय वर्ष 2026 में बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये (लगभग 2.1 गुना) हो गया।

इसी अवधि में समूह का मुनाफा 32 हजार करोड़ रुपये से 5.4 गुना की छलांग लगाकर 1.71 लाख करोड़ रुपये के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। चंद्रशेखरन की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ कर्ज घटाना नहीं, बल्कि नए कारोबार में भारी निवेश करना रही।

जमशेदपुर के सीनियर जर्नलिस्ट व कार्पोरेट मामले के जानकार अश्विनी रघुवंशी बताते हैं, चंद्रशेखरन ने घाटे वाली कंपनियों को दुरुस्त किया और एयर इंडिया का ऐतिहासिक अधिग्रहण किया। विस्तारा व एयरएशिया का विलय कराकर एविएशन सेक्टर में टाटा का दबदबा स्थापित किया।

साथ ही सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रानिक्स, बैटरी और डिजिटल कारोबार (जैसे बिगबास्केट) में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया। आज समूह की सभी सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप तेजी से बढ़ा है और टाटा लगभग 400 अरब डॉलर का साम्राज्य बन चुका है।

कोविड महामारी, भू-राजनीतिक तनाव और नए कारोबार के शुरुआती झटकों के बावजूद उन्होंने समूह को वित्तीय रूप से मजबूत और भविष्य के लिए तैयार किया।

टाटा स्टील व टाटा मोटर्स को कर्जमुक्त कर नई उड़ान दी

समूह की दो सबसे बड़ी कंपनियों, टाटा स्टील और टाटा मोटर्स के कायाकल्प में चंद्रशेखरन ने रणनीतिक चाणक्य की भूमिका निभाई। 2017 में टाटा मोटर्स का पैसेंजर व्हीकल (पीवी) कारोबार भारी नुकसान में था और बाजार में इसकी हिस्सेदारी पांच प्रतिशत से भी नीचे गिर चुकी थी। कंपनी पर 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज था।

चंद्रशेखरन ने जोखिम लेते हुए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) तकनीक पर पूरा जोर दिया। नतीजा यह हुआ कि टाटा मोटर्स भारत की सबसे बड़ी ईवी निर्माता कंपनी बन गई। पीवी मार्केट शेयर भी बढ़कर 13-14 प्रतिशत हो गया।

आज भारतीय आटो कारोबार पूरी तरह से कर्ज-मुक्त होकर शुद्ध नकदी (नेट कैश पॉजिटिव) की स्थिति में आ गया है। उन्होंने पीवी और कमर्शियल व्हीकल (सीवी) को अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनी बनाया और जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) को रीइमेजिन रणनीति के तहत एक इलेक्ट्रिक लक्जरी ब्रांड में बदलने की दिशा दी।

दूसरी तरफ, टाटा स्टील में उन्होंने भारी कर्ज घटाने और भारत-केंद्रित क्षमता विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया। कलिंगनगर फेज-2 के पूरा होने से कंपनी की कुल क्षमता 26.1 मिलियन टन प्रति वर्ष पहुंच गई है। वित्तीय वर्ष 2026 में टाटा स्टील का रिकार्ड क्रूड स्टील उत्पादन 23.4 मिलियन टन रहा और शुद्ध कर्ज घटकर 80 हजार करोड़ रुपये रह गया।

इसके अलावा उन्होंने यूरोपीय आपरेशंस में ग्रीन (हरित) स्टील की ओर भी तेजी से कदम बढ़ाया। पूंजी अनुशासन और नई तकनीक पर फोकस कर उन्होंने दोनों कंपनियों की किस्मत बदल दी।

यह भी पढ़ें- चंद्रशेखरन के बाद टाटा समूह का अगला बॉस कौन होगा? नोएल टाटा, सौरभ अग्रवाल या टीवी नरेंद्रन

यह भी पढ़ें- टाटा ट्रस्ट में भारी कलह, विजय सिंह की भी हो चुकी विदाई; चंद्रशेखरन के बाद आगे क्या

यह भी पढ़ें- नोएल टाटा से बिगड़ता रहा रिश्ता, रतन टाटा के निधन के बाद अकेले पड़े चंद्रशेखरन; नए निवेश और लिस्टिंग के मुद्दे पर रार

यह भी पढ़ें- टाटा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन: जमशेदपुर का ‘दामाद’ जो शहर को मानता है परिवार, झारखंड में 11,000 करोड़ का निवेश!