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    पोटका के प्रवासी मजदूर की चेन्नई में मौत: आर्थिक तंगी से शव भी नहीं ला पाया परिवार, वहीं हुआ अंतिम संस्कार 

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 06:28 PM (GMT+05:30)

    पोटका के प्रवासी मजदूर दशरथ मुंडा की चेन्नई में कार्य के दौरान मौत हो गई। आर्थिक तंगी के कारण परिवार शव को गांव नहीं ला सका और उनका अंतिम संस्कार चेन् ...और पढ़ें

    मृतक की पत्नी रानी मुंडा ने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    मृतक की पत्नी रानी मुंडा ने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    HighLights

    1. प्रवासी मजदूर दशरथ मुंडा की चेन्नई में कार्य के दौरान मौत।

    2. चेन्नई में ही हुआ अंतिम संस्कार, परिवार को सहायता की मांग।

    संसू, पोटका। रोजगार की तलाश में झारखंड से चेन्नई गए पोटका प्रखंड के 28 वर्षीय प्रवासी मजदूर दशरथ मुंडा की कार्य के दौरान मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही मृतक के पैतृक गांव और परिवार में मातम पसर गया है। 
     
    दशरथ साल 2025 से चेन्नई की इब्राहिम इंटरप्राइजेज नामक कंपनी में काम कर रहे थे। वह अपने घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे, जिनकी आय से वृद्ध मां, पत्नी और दो छोटे बच्चों का भरण-पोषण होता था।
     

    आर्थिक तंगी: नहीं आ सका शव, चेन्नई में ही हुआ अंतिम संस्कार

    इस घटना का सबसे हृदयविदारक पहलू यह रहा कि बेहद गरीब होने के कारण पीड़ित परिवार शव को वापस गांव लाने के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये की व्यवस्था नहीं कर सका। आखिरकार, मजबूरी में दशरथ मुंडा का अंतिम संस्कार चेन्नई में ही करना पड़ा।

    मृतक की पत्नी रानी मुंडा ने रोते हुए बताया कि उनके पति ही पूरे परिवार का सहारा थे। उनके चले जाने से अब बुजुर्ग सास ममता मुंडा और दो बेटों 8 वर्षीय ओम मुंडा और 6 वर्षीय शिव मुंडा के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
     

    सरकारी सहायता और मुआवजे की मांग 

    मामले की जानकारी मिलने पर समाजसेवी किशन गुप्ता ने जिला प्रशासन और सरकार से पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह परिवार पूरी तरह भूमिहीन है, इसलिए इन्हें: सरकारी प्रावधानों के तहत तत्काल मुआवजा दिया जाए।

    उन्‍होंने कहा क‍ि रहने के लिए भूमि का पट्टा और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिले। साथ ही, चेन्नई स्थित संबंधित कंपनी से भी उचित हर्जाना दिलवाया जाए।

    स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलना बड़ी विडंबना

    स्थानीय ग्रामीण शंकर मुंडा ने क्षेत्र की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पोटका और आस-पास के इलाकों में कई बड़े उद्योग और खदानें संचालित हैं। इसके बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। 
     
    इसी मजबूरी में युवाओं को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है, जहां वे हादसों का शिकार होते हैं। उन्होंने मांग की कि स्थानीय कंपनियों में यहां के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी दी जाए।