ट्रेनों की लेटलतीफी के खिलाफ धरने पर बैठे जमशेदपुर विधायक, रेल अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी के खिलाफ टाटानगर स्टेशन पर धरना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट ...और पढ़ें
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समर्थकों के साथ धरने पर बैठे सरयू राय। फोटो जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। चक्रधरपुर रेल मंडल में पिछले तीन वर्षों से ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी को लेकर अब जनप्रतिनिधियों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है।
इसी कड़ी में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय मंगलवार सुबह से टाटानगर रेलवे स्टेशन के बाहर विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ धरने पर बैठ गए।
धरने के दौरान उन्होंने रेलवे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सिर्फ एक ही मांग है कि टाटानगर आने वाली ट्रेनों को समय पर चलाया जाए।
उन्होंने बताया कि चक्रधरपुर से टाटानगर की दूरी तय करने में जहां सामान्यतः कम समय लगना चाहिए, वहीं वर्तमान में ट्रेनों को 5 से 6 घंटे तक लग रहे हैं।
विधायक ने कहा कि चांडिल, कॉन्ट्रा और रखा माइंस जैसे स्टेशनों तक ट्रेनें समय पर पहुंचती हैं, लेकिन जमशेदपुर आते-आते 3 से 4 घंटे की देरी हो जाती है। इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, इसका स्पष्ट जवाब रेलवे अधिकारियों के पास नहीं है।
उन्होंने चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम तरुण हुरिया के बयान का जिक्र करते हुए बताया कि प्लेटफॉर्म की कमी और मालगाड़ियों के लिए अलग लूप लाइन नहीं होने को देरी का कारण बताया गया है। हालांकि, उन्होंने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे बुनियादी काम वर्षों पहले पूरे हो जाने चाहिए थे।
आम लोगों को होती है परेशानी
सरयू राय ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार यात्री ट्रेनों को सुदूर इलाकों में रोककर मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी होती है।
उन्होंने कहा कि कई ट्रेनों में पैंट्री कार तक नहीं होती, जिससे बच्चों और यात्रियों को भूखे रहना पड़ता है। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि रेल अधिकारियों की संवेदनशीलता खत्म हो चुकी है।
विधायक ने बताया कि ट्रेनों की देरी का असर मजदूरों पर भी पड़ रहा है। देर से पहुंचने के कारण उनकी हाजिरी कट जाती है, जिससे अब वे जमशेदपुर आने से कतराने लगे हैं। इसके अलावा टेंपो चालकों और अन्य वर्गों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने रेलवे प्रशासन से सवाल किया कि आखिर प्राथमिकता किसे दी जानी चाहिए—यात्री ट्रेनों को या मालगाड़ियों को। उन्होंने मांग की कि यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
जरूरत पड़ी तो रेल मंत्री से करेंगे मुलाकात
धरने के दौरान विधायक ने कहा कि यह आंदोलन उनके व्यक्तिगत विवेक से शुरू किया गया है और इसमें सभी राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो एक समिति बनाकर ट्रेनों की देरी की समीक्षा कराई जाएगी और रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वे दिल्ली जाकर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और रेल मंत्री से मुलाकात करेंगे और जमीनी हकीकत से अवगत कराएंगे। साथ ही, बड़ी-बड़ी घोषणाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करने का भी काम