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    झारखंड में 1.40 करोड़ लोगों की होगी सिकल सेल और थैलेसीमिया की जांच, घर-घर जाकर लेंगे सैंपल

    Updated: Wed, 08 Apr 2026 03:56 PM (GMT+05:30)

    झारखंड सरकार राज्य के 1.4 करोड़ लोगों की सिकल सेल और थैलेसीमिया स्क्रीनिंग करेगी, जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर अभियान शुरू करने की तैया ...और पढ़ें

    निजी एजेंसी को दी जाएगी जिम्मेदारी, तीन क्लस्टरों में बंटेंगे जिले। (विजुअल एआई जेनरेटेड)

    निजी एजेंसी को दी जाएगी जिम्मेदारी, तीन क्लस्टरों में बंटेंगे जिले। (विजुअल एआई जेनरेटेड)

    HighLights

    1. स्वास्थ्य विभाग देगा हर माह स्क्रीनिंग का लक्ष्य।

    2. निजी एजेंसी घर-घर जाकर सैंपल एकत्र करेगी।

    3. रक्त बैंकों का रखरखाव भी निजी एजेंसी करेगी।

    राज्य ब्यूरो, रांची। सिकल सेल व थैलेसीमिया की समय पर पहचान के लिए राज्य के 1.40 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। यह आबादी शून्य से पांच तथा 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग की है। राज्य सरकार ने इस आबादी की सिकल सेल व थैलेसीमिया की जांच की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को देने का निर्णय लिया है।

    इसे लेकर टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है। राज्य के सभी 24 जिलों को तीन क्लस्टरों में बांटकर लोगों की जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग एजेंसी को जांच के लिए प्रतिमाह लक्ष्य देगा। जांच के लिए सैंपल डोर स्टेप लिया जाएगा।

    चयनित एजेंसी लक्षित आबादी की फील्ड स्क्रीनिंग के लिए ज़रूरी मैनपावर व आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगी। इसके लिए एचपीएलसी से सिकल सेल और थैलेसीमिया के लिए ड्राइड ब्लड स्पाट (डीबीएस) सैंपल टेस्टिंग होगी।

    साथ ही, जांच के परिणाम नेशनल सिकल सेल पोर्टल पर डाले जाएंगे। इसके बाद जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड बांटे जाएंगे और प्रचार-प्रसार की गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    निजी एजेंसी को जिम्मेदारी देने का उद्देश्य सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया के लिए स्क्रीनिंग, सैंपल कलेक्शन, सैंपल ट्रांसपोर्टेशन का कवरेज बढ़ाना है।

    फील्ड वर्क की रियल टाइम मानिटरिंग होगी

    इसके लिए थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया की शुरुआती स्क्रीनिंग, पहचान और सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया के लिए सिंगल स्टेप क्वांटिटेटिव टेस्ट का इस्तेमाल करके बीमारी की दर को कम करना है।

    सभी टेस्ट रिपोर्ट के लिए डैशबोर्ड होगा, ताकि फील्ड वर्क की रियल टाइम मानिटरिंग के साथ रिपोर्ट मिल सके। बताते चलें कि हीमोग्लोबिनोपैथी के अंतर्गत सिकल सेल व थैलेसीमिया रेड ब्लड सेल्स की वंशानुगत बीमारियां हैं।

    विश्व में थैलेसीमिया प्रभावित बच्चों की सबसे ज़्यादा संख्या भारत में लगभग एक से 1.5 लाख है। झारखंड में भी बड़ी संख्या में बच्चे इससे प्रभावित हैं। सिकल सेल भी भारत में हीमोग्लोबिनोपैथी में सबसे ज़रूरी क्लिनिकल बीमारियों में से एक है।

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    इन दोनों रोगों से हेल्थकेयर सिस्टम पर खर्च और रिसोर्स दोनों के मामले में बोझ पड़ता है। बीमारी की प्रकृति को देखते हुए भारत सरकार ने सिकल सेल डिजीज को ‘दिव्यांगता’ की सूची में शामिल किया है।

    बल्ड बैंकों के रखरखाव व संचालन भी करेगी निजी एजेंसी

    राज्य में ब्लड बैंकों के सृदृढ़ीकरण, रखरखाव तथा संचालन की जिम्मेदारी भी निजी एजेंसी द्वारा की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इसे लेकर रिक्वेस्ट फार क्वालिफिकेशन कम रिक्वेस्ट फार प्रपोजल आमंत्रित किया है।

    राज्य में रक्त की कमी को दूर करने के लिए बल्ड बैंकों को सृदृढ़ करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। इसके तहत रक्तदान शिविर आयोजित करने की जिम्मेदारी भी निजी एजेंसी को दी जाएगी। 

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