टाटा कमिंस वेज रिवीजन: वेतन समझौते को लेकर प्रबंधन व यूनियन के बीच शह-मात का खेल शुरू, जानें क्या है पूरा विवाद
जमशेदपुर के टाटा कमिंस में वेतन संशोधन समझौते को लेकर प्रबंधन और यूनियन के बीच गतिरोध गहरा गया है। प्रबंधन की 'देरी की राजनीति' के बीच यूनियन अध्यक्ष ...और पढ़ें

HighLights
प्रबंधन वार्ता में देरी कर यूनियन पर दबाव बना रहा।
यूनियन अध्यक्ष की वापसी पर जवाबी रणनीति बनेगी।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा कमिंस में कर्मचारियों के आगामी वेज रिवीजन (वेतन संशोधन) समझौते को लेकर प्रबंधन और यूनियन के बीच आंतरिक खींचतान तेज हो गई है। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति और दांवपेच में जुट गए हैं।
प्रबंधन अपनी शर्तों पर समझौता कराने के लिए यूनियन को घेरने की योजना पर काम कर रहा है। दूसरी तरफ यूनियन अब मैनेजमेंट पर जल्द से जल्द वार्ता शुरू करने का दबाव बनाने के लिए कमेटी मेंबरों की बैठक बुलाने जा रही है।
15 दिन बीते, लोकल मैनेजमेंट ने नहीं भेजा वार्ता का न्योता
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में नया मोड़ तब आया जब टाटा कमिंस के शीर्ष अधिकारियों (TopManagement) ने यूनियन को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे स्थानीय प्रबंधन (LocalManagement) के साथ ही टेबल टॉक कर समझौता फाइनल करें। लेकिन, इस निर्देश के 15 दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय प्रबंधन ने अब तक यूनियन को आधिकारिक तौर पर बातचीत के लिए आमंत्रित नहीं किया है।
- यूनियन के सामने ऊहापोह की स्थिति: शीर्ष नेतृत्व के आदेश के बाद भी स्थानीय स्तर पर वार्ता शुरू न होने से यूनियन के समक्ष असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है कि वे अब अपनी मांग लेकर किसके पास गुहार लगाएं।
समझिए क्या है मैनेजमेंट की 'डिले पॉलिटिक्स'?
औद्योगिक मामलों के जानकारों का कहना है कि वार्ता में देरी करना अक्सर प्रबंधन की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा होता है। बातचीत को टालने से कर्मचारियों के भीतर वेज रिवीजन को लेकर बेचैनी बढ़ती है।
इस कारण वे अपनी ही यूनियन पर जल्द समझौता करने का दबाव बनाने लगते हैं। जब कर्मचारियों का दबाव बढ़ता है, तो यूनियन की मोलभाव करने की क्षमता (Bargaining Power) कमजोर हो जाती है और अंततः उन्हें प्रबंधन की शर्तों के आगे झुकना पड़ता है।
यूनियन अध्यक्ष के लौटते ही बनेगी जवाबी रणनीति
यूनियन अब प्रबंधन के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए जवाबी पहल करने जा रही है। वर्तमान में टाटा कमिंस यूनियन के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह शहर से बाहर हैं।
उनके जमशेदपुर लौटते ही यूनियन की बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में प्रबंधन के मौजूदा रुख, उसकी रणनीतियों और टालमटोल की नीति पर गंभीर चर्चा होगी और उसी के अनुसार यूनियन अपना अगला कदम तय करेगी।