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    टाटा स्टील कैंटीन में दाल-चावल बंद, अब परोसी जाएगी खिचड़ी-बिरयानी, दूसरी बार मेन्यू चेंज से भड़के कर्मचारी

    Updated: Thu, 19 Mar 2026 07:40 PM (GMT+05:30)

    Tata Steel Canteen Menu में फिर बदलाव किया गया है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी है। पहले रोटी बंद हुई, अब दोपहर के भोजन में दाल-चावल की जगह तीन दिन ख ...और पढ़ें

    कैंटीन में दाल-चावल की जगह खिचड़ी-बिरयानी मिलेगी। (फोटो: फाइल)

    कैंटीन में दाल-चावल की जगह खिचड़ी-बिरयानी मिलेगी। (फोटो: फाइल)

    HighLights

    1. सात दिन में ही मेन्यू बदला, कर्मचारियों में नाराजगी।

    2. एलपीजी कमी के कारण मेन्यू में बदलाव किया गया।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील की कैंटीन में पहले रोटी बंद हुई और अब कर्मचारियों को सप्ताह में छह दिन चावल-दाल भी नहीं मिलेंगे। इसके बदले में तीन-तीन दिन खिचड़ी व बिरयानी कर्मचारियों को परोसे जाएंगे।

    टाटा स्टील में बुधवार 18 मार्च से ही नया मेन्यू प्रभावी कर दिया गया है। कमर्शियल एलपीजी की किल्लत के बाद टाटा स्टील में 11 मार्च को सेंट्रल कैंटीन मैनेजिंग कमेटी की बैठक हुई थी जिसमें पूर्व में दिए जा रहे खाने के मेन्यू में बदलाव किया गया था।

    इसके तहत 16 में से 10 कैंटीन में ही खाना बनाने का निर्णय लिया गया। वहीं, कर्मचारियों को परोसी जाने वाली रोटी भी को बंद कर दिया गया लेकिन नए मेन्यू प्रभावी होने के सात दिनों के अंदर ही फिर से व्यापक बदलाव किया गया है।

    अब कैंटीन में रोटी के साथ-साथ दोपहर के भोजन में दाल-चावल भी बंद कर दिया गया है। इसके बदले में कर्मचारियों को तीन दिन खिचड़ी, चटनी व चोखा और तीन दिन बिरयानी, बूंदी रायता व आचार दिए जाएंगे।

    कर्मचारियों से लेकर कमेटी मेंबरों तक में नाराजगी

    जबकि एक दिन, रविवार को दाल-भात परोसे जाएंगे। वहीं, रात के भोजन में सप्ताह में चार दिन दाल-चावल व तीन दिन सत्तू व दाल पूरी दिए जाएंगे। इस नए बदलाव को लेकर कर्मचारियों से लेकर कमेटी मेंबरों तक में नाराजगी देखी जा रही है।

    कई कमेटी मेंबरों ने टाटा वर्कर्स यूनियन के वाट्सएप ग्रुप में प्रतिक्रिया देकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। कुछ कमेटी मेंबरों का कहना है कि जो कर्मचारी मधुमेह के रोगी हैं वे चावल के बदले में तीन-तीन दिन खिचड़ी व बिरयानी कैसे खा पाएंगे।

    खबरें और भी

    इस मामले में कई कमेटी मेंबरों ने सेंट्रल कैंटीन मैनेजमेंट कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं कि आखिर कर्मचारी इस तरह का खाना कैसे खा खा पाएंगे जो उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालेगा। टाटा स्टील की कैंटीन में हर दिन लगभग 16 हजार स्थायी व ठेका कर्मचारी नाश्ता व खाना खाते हैं।

    कैंटीन में अंडा भी बंद

    कैंटीन में कर्मचारियों को पहले उबला हुआ अंडा दिया जाता था लेकिन इसे भी अगले आदेश तक के लिए बंद कर दिया गया है। कुछ कमेटी मेंबरों का कहना है कि जिन कर्मचारियों ने पहले से बुकिंग कराई है उन्हें भी अंडा नहीं दिया जा रहा है।

    वहीं, कुछ कमेटी मेंबरों ने कहा है कि मधुमेह के रोगियों के लिए पूरे साल उबला हुआ अंडा दिया जाना चाहिए।

    कोक ओवन गैस पर पड़ रहा है दबाव

    इस मामले में एक अधिकारी ने बताया कि कमर्शियल एलपीजी सिलिंडेर की आपूर्ति ठप होने के बाद टाटा स्टील में 16 में से 10 कैंटीन में ही खाना बन रहा है लेकिन इन पर भी भारी दबाव है।इसके कारण कोक ओवन गैस से भी खाना समय पर नहीं बन पा रहा है।

    इसके कारण मेन्यू में ऐसे व्यंजनों को शामिल किया गया है जिसे बनाने में कम समय लगे।

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