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    अब महंगा होगा घर बनाना! खाड़ी संकट से स्टील में आग, टाटा स्टील कलर्स ने बढ़ाए दाम

    Updated: Sat, 28 Mar 2026 12:21 PM (GMT+05:30)

    खाड़ी युद्ध और भू-राजनीतिक संकट से घरेलू इस्पात बाजार प्रभावित हुआ है। टाटा स्टील कलर्स ने कच्चे माल की किल्लत और बढ़ती लागत के कारण अपने उत्पादों की ...और पढ़ें

    खाड़ी संकट से टाटा स्टील के उत्पाद महंगे, कच्चे माल की किल्लत से उत्पादन प्रभावित।

    खाड़ी संकट से टाटा स्टील के उत्पाद महंगे, कच्चे माल की किल्लत से उत्पादन प्रभावित।

    HighLights

    1. खाड़ी संकट से प्रोपेन गैस और कच्चे माल की किल्लत।

    2. टाटा स्टील कलर्स ने उत्पादों की कीमतें बढ़ाईं, आपूर्ति बाधित।

    3. गैल्वेनाइज्ड क्वाइल ₹3,100 प्रति टन महंगा हुआ।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पश्चिम एशिया (खाड़ी) में गहराते युद्ध और भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर अब घरेलू इस्पात बाजार और निर्माण उद्योग पर व्यापक रूप से दिखने लगा है।

    प्रमुख इस्पात निर्माता टाटा स्टील कलर्स (पूर्ववर्ती टाटा ब्लूस्कोप) ने कच्चे माल की भारी किल्लत और लगातार बढ़ती इनपुट लागत के कारण अपने सभी प्रमुख ग्राहकों को आपूर्ति बाधित होने और उत्पादों की कीमतों में अनिवार्य बढ़ोतरी की सूचना दे दी है।

    उत्पादन पर कैसे पड़ रहा असर

    कंपनी प्रबंधन के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और लाजिस्टिक्स संबंधी बाधाओं के चलते औद्योगिक प्रोपेन गैस की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और इसकी भारी कमी हो गई है।

    इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में जिंक, एल्युमिनियम और विशेष इंडस्ट्रियल पेंट की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है। इन आवश्यक कच्चे मालों की अप्रत्याशित महंगाई और अनुपलब्धता ने टाटा स्टील कलर्स के कारखानों में दैनिक परिचालन और उत्पादन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित किया है।

    आपूर्ति की इस भारी तंगी के कारण मुंबई एक्स-वर्क्स के आधार पर गैल्वेनाइज्ड प्लेन क्वाइल (0.8 मिमी, 120 जीएसएम) की बेंचमार्क कीमतों में एक ही सप्ताह के भीतर 3,100 रुपये प्रति टन का तेज उछाल दर्ज किया गया है।

    इस वृद्धि के बाद नई दरें उछलकर 76,800 रुपये प्रति टन के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।

    इन उत्पादों के लिए क्यों जरूरी हैं ये तत्व?

    टाटा स्टील कलर्स मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक उपयोग के लिए रंगीन व जंगरोधी छत और दीवार के प्रोफाइल (कलर कोटेड और गैल्वेनाइज्ड स्टील शीट) का निर्माण करती है।

    इन चादरों की मजबूती, लंबी उम्र और जंग से सुरक्षा (कोरोजन रेजिस्टेंस) सुनिश्चित करने के लिए बेस स्टील पर जिंक और एल्युमिनियम की एक मोटी परत चढ़ाई जाती है। वहीं, उत्पादों को बेहतरीन फिनिश देने और खराब मौसम से बचाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पेंट का इस्तेमाल होता है।

    इसके अलावा, निर्माण प्रक्रिया में स्टील को आवश्यक तापमान पर गर्म करने और कोटिंग के बाद पेंट की बेकिंग प्रक्रिया (भट्ठियों) को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रोपेन गैस एक अत्यंत महत्वपूर्ण औद्योगिक ईंधन है।

    ऐसे में गैस की किल्लत और धातुओं की आसमान छूती कीमतों ने कलर कोटेड स्टील के निर्माण की पूरी व्यवस्था को ही बाधित कर दिया है।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि खाड़ी संकट जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले समय में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत में भारी इजाफा होना तय है।

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