टाटा स्टील ने लुधियाना में शुरू किया भारत का पहला 'Green Steel' प्लांट, ₹3200 करोड़ का निवेश; कबाड़ से बनेगा असली लोहा!
टाटा स्टील ने लुधियाना में भारत का पहला स्क्रैप-आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) प्लांट खोला है। 3,200 करोड़ रुपये के निवेश से बना यह प्लांट प्रति ...और पढ़ें

टाटा स्टील ने लुधियाना में भारत का पहला ग्रीन स्टील प्लांट शुरू किया।
HighLights
भारत का पहला स्क्रैप-आधारित ईएएफ प्लांट लुधियाना में।
3,200 करोड़ रुपये निवेश, 0.75 एमटीपीए उत्पादन क्षमता।
कम कार्बन उत्सर्जन, 100% स्क्रैप और नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील ने आज पंजाब के लुधियाना स्थित हाई-टेक वैली में अपना पहला स्क्रैप-आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) प्लांट का उद्घाटन किया।
यह प्लांट सस्टेनेबल स्टील निर्माण की दिशा में कंपनी की महत्वपूर्ण उपलब्धि है और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कम कार्बन उत्सर्जन वाली स्टील उत्पादन प्रक्रिया को बढ़ावा देगा। इस प्लांट का निर्माण लगभग 3,200 करोड़ रुपये के निवेश से पूरा हुआ है।
इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 0.75 मिलियन टन (0.75 एमटीपीए) है। प्लांट को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है ताकि प्रति टन स्टील उत्पादन पर कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ₂) उत्सर्जन 0.3 टन से कम रहे। यह टाटा स्टील की 2045 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने की प्रतिबद्धता की ओर एक बड़ा कदम है।
पर्यावरण-अनुकूल तकनीक और सर्कुलर इकोनॉमी पर जोर
प्लांट में 100 प्रतिशत स्टील स्क्रैप को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें से लगभग 40 प्रतिशत स्क्रैप कंपनी के रोहतक (हरियाणा) स्थित स्टील रीसाइक्लिंग प्लांट से प्राप्त होगा।
साथ ही, प्लांट लगभग 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा पर संचालित होगा, जिससे पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस की तुलना में कार्बन उत्सर्जन और पानी की खपत में काफी कमी आएगी।
यह सुविधा टाटा स्टील के प्रमुख रिटेल ब्रांड 'टाटा टिस्कॉन' के तहत कंस्ट्रक्शन-ग्रेड स्टील रिबार का उत्पादन करेगी। इससे निर्माण क्षेत्र में कंपनी की बाजार उपस्थिति और मजबूत होगी।

उद्घाटन समारोह में प्रमुख हस्तियां मौजूद
उद्घाटन समारोह में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, टाटा स्टील के सीईओ एवं एमडी टी. वी. नरेंद्रन सहित अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और कंपनी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि जैसे-जैसे भारत जलवायु-संवेदनशील भविष्य की ओर बढ़ रहा है, सस्टेनेबिलिटी एक राष्ट्रीय आवश्यकता बन गई है। लुधियाना ईएएफ प्लांट टाटा ग्रुप की हरित और अधिक मजबूत औद्योगिक भविष्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
टी. वी. नरेंद्रन ने बताया कि यह प्लांट 2045 तक नेट जीरो हासिल करने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। कंपनी सर्कुलर इकोनॉमी के लिए नए दृष्टिकोण से पूंजी निवेश कर रही है, ऐसी तकनीकों को बढ़ावा दे रही है जो संसाधनों की खपत कम करती हैं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनी रहती हैं। उन्होंने पंजाब सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
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सामुदायिक विकास और सीएसआर पहल
पिछले तीन वर्षों में टाटा स्टील फाउंडेशन ने प्लांट के आसपास के समुदायों के साथ मिलकर स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में काम किया है। प्रमुख पहलों में स्थानीय आईटीआई छात्रों के लिए रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण, महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर, सोलर ऊर्जा से संचालित स्ट्रीट लाइट्स, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां, सामुदायिक कचरा प्रबंधन, स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा और मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति शामिल हैं।
एक नजर में प्लांट
- बड़ा निवेश: 3,200 करोड़ रुपये की लागत से लुधियाना की हाई-टेक वैली में लगा प्लांट।
- पर्यावरण अनुकूल: प्रति टन स्टील उत्पादन पर 0.3 टन से भी कम होगा CO2 उत्सर्जन।
- 100% स्क्रैप का उपयोग: पुराने लोहे (Scrap) से बनेगा नया स्टील, सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा।
- उद्घाटन: पंजाब के सीएम भगवंत मान और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने किया उद्घाटन।
- रोजगार और विकास: स्थानीय आईटीआई छात्रों के लिए ट्रेनिंग और महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर।
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