VIP कल्चर ने ली जान: जामताड़ा में मंत्री के स्वागत में जुटा रहा अस्पताल प्रबंधन, सर्पदंश से मरीज की मौत
जामताड़ा में स्वास्थ्य मंत्री के स्वागत की तैयारियों में व्यस्त अस्पताल में एक सर्पदंश पीड़ित महिला की मौत हो गई। एंबुलेंस न मिलने पर परिजन उसे टोटो स ...और पढ़ें
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मरीज को अस्पताल ले जाते परिजन। फोटो जागरण
HighLights
मंत्री के स्वागत में व्यस्त अस्पताल में महिला की मौत।
सर्पदंश पीड़ित महिला को नहीं मिली 108 एंबुलेंस सेवा।
टोटो से अस्पताल पहुंची, इलाज के दौरान दम तोड़ा।
जागरण संवाददाता, जामताड़ा। जामताड़ा सदर अस्पताल में मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के आगमन और स्वागत का इंतजार किया जा रहा था। अस्पताल परिसर में कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं।
इसी बीच सदर प्रखंड की गोपालपुर पंचायत के दूधकेबड़ा गांव की निवासी सेंजली किस्कू, जोकि सर्पदंश से गंभीर हालत में बदहवाश हो चुकी थी।
उसे लेकर स्वजन टोटो से सदर अस्पताल पहुंचे। स्वजनों ने बताया कि मरीज की हालत गंभीर होने पर उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा पर कई बार फोन किया, लेकिन कई बार प्रयास के बाद भी कॉल नहीं लग सका।
काफी प्रयास के बाद भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने पर मजबूरी में टोटो से मरीज को अस्पताल लाना पड़ा, लेकिन महिला ने इलाज के दौरान कुछ ही देर बाद दम तोड़ दिया।
मंत्री के दौरे के बाद भी सिस्टम बीमार
एक ओर स्वास्थ्य मंत्री के स्वागत और कार्यक्रम की तैयारियों में अस्पताल प्रशासन व्यस्त था, वहीं दूसरी ओर गंभीर मरीज का टोटो से अस्पताल पहुंचना, वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
लोगों ने सवाल उठाया कि जब जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री का कार्यक्रम हो रहा था, तब भी एक गंभीर मरीज को समय पर एंबुलेंस सुविधा क्यों नहीं मिल सकी।
इतना ही नहीं सदर अस्पताल के तमाम सीनियर डाक्टर भी गंभीर हालत में पहुंची आदिवासी महिला मरीज का इलाज करने और हाल जानने की बजाय कार्यक्रम में ही व्यस्त रह गए।
हेल्थ सिस्टम पर उठे सवाल
यह घटना जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और 108 एम्बुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली और सदर अस्पताल प्रबंधन की ओर से इलाज में बरती जा रही गंभीरता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी दावों के बावजूद आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में अब भी कई खामियां हैं।
जरूरत इस बात की है कि 108 एंबुलेंस सेवा को प्रभावी बनाया जाए, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सके और उन्हें टोटो जैसे साधनों का सहारा न लेना पड़े। साथ ही सदर अस्पताल में अबतक आईसीयू की सेवा उपलब्ध ना हो पाने की वजह से भी गंभीर हालत में पहुंच रहे मरीजों को रेफर होने के चक्कर में अपनी जान गंवानी पड़ रही है।