2 नदियों के संगम पर बसा 'बैकुंठधाम', कोडरमा में महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ रही आस्था
कोडरमा के चंदवारा स्थित दोमुहानी बैकुंठधाम शिव मंदिर दो नदियों के संगम पर स्थित एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल बन गया है। ...और पढ़ें

2 नदियों के संगम पर बसा बैकुंठधाम
HighLights
दो नदियों के पवित्र संगम पर स्थित है यह शिवधाम।
झारखंड सरकार ने इसे जिलास्तरीय पर्यटन स्थल घोषित किया।
सावन में बिहार, बंगाल सहित अन्य राज्यों से आते श्रद्धालु।
संवाद सहयोगी, कोडरमा। प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक वातावरण और अटूट आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है कोडरमा जिले के चंदवारा प्रखंड के पूतो स्थित दोमुहानी बैकुंठधाम शिव मंदिर में। दो स्थानीय नदियों के पवित्र संगम पर स्थित यह धाम आज झारखंड के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।
उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर स्थापित महाकाल स्वरूप शिवलिंग, विशाल मंदिर परिसर और प्राकृतिक वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनूठा अनुभव कराता है। सावन माह में यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है।
बिहार और पश्चिम बंगाल से भी आते हैं भक्त
सावन की प्रत्येक सोमवारी, महाशिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालु दोमुहानी संगम में आस्था की डुबकी लगाने के बाद भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना भोलेनाथ अवश्य पूरी करते हैं।
यही कारण है कि कोडरमा ही नहीं, बल्कि गिरिडीह, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, रांची, बिहार और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
जिलास्तरीय पर्यटन स्थल घोषित
झारखंड सरकार द्वारा दोमुहानी बैकुंठधाम को जिलास्तरीय पर्यटन स्थल घोषित किए जाने के बाद यहां आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास हुआ है।

सड़क, प्रकाश व्यवस्था, मंदिर परिसर, श्रद्धालुओं के ठहरने और अन्य सुविधाओं के विस्तार से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले दो वर्षों में यह स्थल धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभरा है।
पूरे सावन गूंजता है यहां अखंड कीर्तन
सावन की दूसरी सोमवारी पर डिग्री कॉलेज से बैकुंठधाम तक भव्य कावड़ पदयात्रा का आयोजन अब परंपरा बन चुकी है। पिछले दो वर्षों से आयोजित इस पदयात्रा में हजारों कांवड़िये शामिल होते हैं। इस वर्ष भी 10 अगस्त को विशाल कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी, जिसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
पूरा क्षेत्र 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठता है।
पूरे सावन गूंजता है अखंड कीर्तन बैकुंठधाम की एक और विशेष पहचान यहां पूरे सावन माह चलने वाला अखंड कीर्तन है। सावन पूर्णिमा के दिन भंडारे के साथ इसका समापन होता है।
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60 दिनों तक भजन-कीर्तन और आराधना
मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार संतान सुख की कामना लेकर आने वाले निसंतान दंपती यहां 60 दिनों तक भजन-कीर्तन और आराधना करते हैं।

मंदिर परिसर में भगवान शिव के अलावा मां पार्वती, मां चामुंडा, मां कालिका, मां संतोषी, भगवान श्रीराम, माता सीता, मां दुर्गा सहित अनेक देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी सुधेश्वर प्रजापति वर्षों से केवल फलाहार करते हैं और प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण करते हैं।
1972 में झोपड़ीनुमा मंदिर से हुई थी शुरुआत
बैकुंठधाम का इतिहास वर्ष 1972 से जुड़ा है। बताया जाता है कि झरिया देवी ने यहां कलश स्थापित कर पूजा स्थल का चयन किया था। इसके बाद रेवल कुम्हार और भागू यादव के प्रयास से एक छोटे से झोपड़ीनुमा मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू हुई। समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और आज यह मंदिर लगभग 10 एकड़ में फैले भव्य धार्मिक परिसर का रूप ले चुका है।
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मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर भगवान शिव की लगभग 30 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं का स्वागत करती है। परिसर में धर्मशाला, विवाह मंडप, पूजा स्थल और श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बाद मंदिर का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
झारखंड के सबसे आकर्षक शिवधामों में शामिल
धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और विकसित होती पर्यटन सुविधाओं का संगम दोमुहानी बैकुंठधाम को झारखंड के सबसे आकर्षक शिवधामों में शामिल कर रहा है।
सावन के इस पावन अवसर पर यहां उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि बैकुंठधाम अब केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
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