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    नोटबंदी मामले में EOU का एक्शन: कोडरमा से बैंककर्मी गिरफ्तार, लाखों रुपये का लेनदेन करने का आरोप

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 10:25 AM (IST)

    बिहार ईओयू ने 2016 की नोटबंदी के दौरान वित्तीय अनियमितता के आरोप में कोडरमा से बैंक ऑफ इंडिया के कर्मी अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया है। ...और पढ़ें

    गिरफ्तार बैंक ऑफ इंडिया कर्मी अरविंद कुमार।

    गिरफ्तार बैंक ऑफ इंडिया कर्मी अरविंद कुमार।

    HighLights

    1. बैंक ऑफ इंडिया कर्मी अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया गया।

    2. 2016 नोटबंदी के दौरान वित्तीय अनियमितता का आरोप है।

    3. बिहार ईओयू ने कोडरमा से आरोपी को दबोचा।

    संवाद सहयोगी, कोडरमा। वर्ष 2016 की नोटबंदी के दौरान हुए कथित वित्तीय अनियमितता मामले में बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोडरमा जिले के डोमचांच स्थित बैंक ऑफ इंडिया की फुलवरिया शाखा में कार्यरत एक बैंककर्मी को गिरफ्तार किया है।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान अरविंद कुमार के रूप में हुई है। वह वर्तमान में फुलवरिया शाखा में कार्यरत था, जबकि मूल रूप से बिहार के दानापुर स्थित पंचवटी नगर का निवासी है।

    ईओयू के अनुसार, नोटबंदी के समय अरविंद कुमार बैंक ऑफ इंडिया की गया शाखा में पदस्थापित था। आरोप है कि उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर अवैध वित्तीय लेन-देन को अंजाम दिया। जांच में यह बात सामने आई कि वादी राजेश कुमार के बैंक खाते का कथित तौर पर उसकी जानकारी और सहमति के बिना उपयोग कर लाखों रुपये का संदिग्ध लेन-देन किया गया।

    इस मामले में राजेश कुमार की शिकायत पर गया के सिविल लाइन थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच बाद में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को सौंप दी गई।

    ईओयू ने बैंकिंग दस्तावेजों, खातों के रिकॉर्ड तथा संदिग्ध लेन-देन की विस्तृत जांच की, जिसमें अरविंद कुमार की भूमिका सामने आने का दावा किया गया।जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ईओयू ने निगरानी अदालत से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त किया। इसके बाद लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी की तलाश शुरू की गई।

    शुक्रवार को ईओयू की टीम ने कोडरमा पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पूछताछ के लिए अपने साथ ले जाया गया, जहां उससे मामले से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है।

    ईओयू अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा नोटबंदी के दौरान हुए संदिग्ध लेन-देन का दायरा कितना व्यापक था। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

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