शमा परवीन केस के बाद फिर चर्चा में कोडरमा, 6 संदिग्धों को IB और पुलिस ने उठाया
कोडरमा का नाम एक साल में दूसरी बार कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़ा है, जहां आईबी और पुलिस ने माधोपुर गांव से छह लोगों को हिरासत में लिया है। ...और पढ़ें

सतगावां के माधोपुर में संदिग्धों के घरों के आसपास जुटे लोग। (जागरण)
HighLights
कोडरमा का नाम एक साल में दूसरी बार आतंकी गतिविधियों से जुड़ा।
माधोपुर गांव से छह लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है।
डिजिटल उपकरण जब्त, सोशल मीडिया गतिविधियों की हो रही जांच।
संवाद सहयोगी, कोडरमा। जुलाई 2025 में गुजरात एटीएस द्वारा झुमरीतिलैया की शमा परवीन की गिरफ्तारी के बाद अब एक बार फिर कोडरमा का नाम कथित आतंकी गतिविधियों की जांच को लेकर चर्चा में है।
गत 30 जुलाई 2025 को कोडरमा का नाम पहली बार आतंकी कनेक्शन के मामले में उस समय चर्चा में आया था, जब गुजरात एटीएस ने बेंगलुरु से झुमरीतिलैया के असनाबाद निवासी शमा परवीन को गिरफ्तार किया था।
शमा पर इंटरनेट मीडिया के माध्यम से कथित आतंकी संगठन से जुड़े होने और गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप लगे थे। मामले की सूचना मिलने के बाद तिलैया थाना पुलिस ने भी उसके पैतृक आवास पहुंचकर परिजनों से पूछताछ की थी।
इस बार सतगावां थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव में आईबी और कोडरमा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद छह लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच के दायरे में आए लोगों की सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि भी चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार हिरासत में लिए गए लोगों में दो मुर्गी बेचने का कारोबार करते हैं, दो परचून की दुकान चलाते हैं, जबकि अन्य छोटे-मोटे व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।
रविवार देर रात आईबी, कोडरमा पुलिस की टीमों ने माधोपुर गांव में संयुक्त छापेमारी कर पांच पुरुषों और एक महिला को हिरासत में लिया।
जांच एजेंसियों के अनुसार इन पर इंटरनेट मीडिया के माध्यम से कथित तौर पर आतंकी से जुड़ी वीडियो सामग्री साझा कर युवाओं को भड़काने का आरोप है।
हालांकि, मामले में अभी तक किसी भी एजेंसी ने आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है और न ही आरोपों की पुष्टि की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
दो लैपटॉप, 12 मोबाइल जब्त
जानकारी के अनुसार छापेमारी के दौरान संदिग्धों के घरों से करीब 12 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, टैब समेत कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं।
इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित आपत्तिजनक सामग्री किस माध्यम से साझा की गई, उसका उद्देश्य क्या था और हिरासत में लिए गए लोगों के संपर्क किन-किन लोगों से थे। डिजिटल डाटा और सोशल मीडिया गतिविधियां जांच का प्रमुख आधार बनी हुई हैं।