झारखंड का लातेहार उगल रहा 'सोना', खनन राजस्व मामले में प्रदेश में नंबर-1; 200% वसूली
लातेहार जिले ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन राजस्व में रिकॉर्ड बनाया है। 755.20 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 1510.86 करोड़ रुपये की वसूली कर जिले ने 20 ...और पढ़ें

लातेहार बना झारखंड का नंबर वन जिला (सांकेतिक तस्वीर)

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जागरण संवाददाता, लातेहार। खनिज संपदा से मालामाल झारखंड का लातेहार जिला इन दिनों सचमुच ‘सोना उगल’ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस जिले ने खनन राजस्व के मामले में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने पूरे राज्य को पीछे छोड़ दिया।
755.20 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले जिले ने 1510.86 करोड़ रुपये की वसूली कर 200 प्रतिशत से अधिक राजस्व संग्रहण का इतिहास रच दिया। इस जबरदस्त उछाल के पीछे सबसे बड़ा हाथ कोयला खनन का रहा। कुल 607.24 करोड़ रुपये सिर्फ कोयला से आए, जिसमें सीसीएल मगध परियोजना ने अकेले 445.29 करोड़ रुपये देकर सबसे बड़ा योगदान दिया।
राजस्व की भारी-भरकम वसूली
इसके अलावा डीवीसी तुबेद कोल माइंस और सीसीएल तेतरियाखांड से भी मोटी आमदनी हुई। कोयले के अलावा अन्य खनिज और मदों से भी राजस्व की झड़ी लगी। रिजर्व प्राइस, पत्थर, ईंट-मिट्टी, मैनेजमेंट फीस और अपफ्रंट पेमेंट जैसे स्रोतों ने खजाना भरने में अहम भूमिका निभाई। खास बात यह रही कि जेएमबीएल सेस के तहत भी भारी-भरकम राशि वसूली गई।
लगातार दो साल से अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहा जिला
दिलचस्प बात यह है कि लातेहार का यह प्रदर्शन कोई एक साल का करिश्मा नहीं है। इससे पहले 2024-25 में भी जिले ने 534.51 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 636.69 करोड़ रुपये जुटाकर रिकॉर्ड बनाया था। यानी लगातार दो साल से यह जिला अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रहा है।
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इधर, अवैध खनन पर प्रशासन की सख्ती ने भी राजस्व बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। साल भर में करीब 4 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, 388 वाहन जब्त किए गए और 51 मामले दर्ज हुए। 54 हजार टन से ज्यादा अवैध खनिज जब्त कर यह साफ संदेश दिया गया कि नियम तोड़ने वालों की अब खैर नहीं।