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    पलामू किला में पर्यटकों के लिए बदले नियम: अब बाइक से एंट्री पर बैन, गाइड के साथ ही घूम सकेंगे वन क्षेत्र 

    Updated: Wed, 08 Jul 2026 03:26 PM (IST)

    रील बनाने की सनक के कारण पलामू किला क्षेत्र में बाइक से प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगल की शांति बनाए रखने के लिए पीटीआर प्रश ...और पढ़ें

    पलामू किला। फोटो जागरण

    पलामू किला। फोटो जागरण

    HighLights

    1. रील बनाने की सनक के बाद पलामू किला में बाइक बैन।

    2. पलामू टाइगर रिजर्व ने वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु लिया यह फैसला।

    3. अब पलामू किला क्षेत्र में केवल अधिकृत गाइड के साथ प्रवेश।

    संवाद सूत्र, बरवाडीह (लातेहार)। कुछ क्षणों की इंटरनेट मीडिया रील बनाने की सनक ने पलामू किला तक बाइक से पहुंचने का रास्ता बंद करा दिया। प्रतिबंधित वन क्षेत्र में बाइक लेकर घुसने, हिरण का पीछा करते हुए वीडियो बनाने और उसे इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करने की घटना के बाद पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है।

    अब पलामू किला क्षेत्र में पर्यटकों के बाइक से प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। प्रशासन का मानना है कि जंगल मनोरंजन का मंच नहीं, वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय है। इंटरनेट मीडिया पर लोकप्रियता की होड़ यदि जंगल की शांति भंग करेगी तो सख्ती भी तय है।

    जानकारी के अनुसार, हाल ही में कुछ पर्यटक बाइक लेकर पलामू किला के प्रतिबंधित वन क्षेत्र में पहुंच गए थे। वहां उन्होंने हिरण का पीछा करते हुए वीडियो बनाया और उसे इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर दिया।

    वीडियो सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और आम नागरिकों ने कड़ी आपत्ति जताई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पीटीआर प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से बाइक के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया।

    झारखंड की ऐतिहासिक धरोहर

    करीब 680 एकड़ क्षेत्र में फैला पलामू किला झारखंड की ऐतिहासिक धरोहरों में प्रमुख स्थान रखता है। इसका निर्माण 16वीं-17वीं शताब्दी में चेरो वंश के राजा प्रताप राय ने कराया था, जबकि बाद में राजा मेदिनी राय ने इसका विस्तार कराया। बेतला राष्ट्रीय उद्यान आने वाले अधिकांश पर्यटक पलामू किला भी देखने पहुंचते हैं।

    यही कारण है कि यह क्षेत्र पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण, दोनों दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। पीटीआर प्रशासन के अनुसार जंगल में बाइक और अन्य वाहनों का शोर वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित करता है।

    कई बार जानवर अपने सुरक्षित आवास छोड़कर दूसरे क्षेत्रों की ओर चले जाते हैं। हाथी, बाघ, भालू और बाइसन जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी को देखते हुए बिना गाइड जंगल में प्रवेश करना पर्यटकों के लिए भी जोखिम भरा है। इसी कारण अनियंत्रित पर्यटन पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया।

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    अब अधिकृत गाइड की मौजूदगी में ही घूम सकेंगे 

    नए नियम के तहत अब बेतला राष्ट्रीय उद्यान, पलामू किला और आसपास के संवेदनशील वन क्षेत्रों में भ्रमण केवल अधिकृत गाइड की मौजूदगी में ही होगा। बिना गाइड किसी भी पर्यटक को जंगल क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी।

    साथ ही वन क्षेत्र में बाइक अथवा अन्य निजी वाहनों के अनाधिकृत प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। पीटीआर के निदेशक प्रवेश कांत जेना ने बताया कि यह निर्णय वन्यजीवों और पर्यटकों दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    उन्होंने पर्यटकों से जंगल की शांति बनाए रखने, कचरा नहीं फैलाने, वन्यजीवों को परेशान नहीं करने तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करने की अपील की।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पीटीआर प्रशासन को उम्मीद है कि नए नियमों से पलामू किला क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को और मजबूती मिलेगी तथा पर्यटन अधिक सुरक्षित, अनुशासित और प्रकृति के अनुकूल ढंग से संचालित हो सकेगा।

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