सो गई खाकी, रो रहा जंगल; पाकुड़ के गोकुलपुर चेकनाका पर लटका हुआ है ताला
पाकुड़ का गोकुलपुर वन चेकनाका, जो कभी जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र था, वन विभाग की लापरवाही के कारण बंद पड़ा है। ...और पढ़ें

गोकुलपुर स्थित वन विभाग के चेकनाका पर लगा ताला। (जागरण)
HighLights
गोकुलपुर चेकनाका वन विभाग की अनदेखी से बंद पड़ा।
चेकनाका बंद होने से वन माफिया सक्रिय हुए।
अवैध तस्करी से पाकुड़ के जंगल खतरे में।
गणेश पांडेय, पाकुड़। सरकारी तंत्र की सुस्ती और विभाग की अनदेखी ने वन विभाग का एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच को 'शोपीस' बना दिया है।
गोकुलपुर स्थित वन विभाग का चेकनाका, जो कभी जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पहली दीवार माना जाता था, आज पूरी तरह शिथिल होकर बंद पड़ा हुआ है।
वन विभाग की इस कुंभकर्णी नींद ने न केवल क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि तस्करों के लिए रास्ते भी साफ कर दिए हैं।
चौबीसों घंटे सक्रिय रहने वाला उक्त चेकनाका वर्तमान में सन्नाटे की चादर ओढ़े हुए है। दरवाजे पर लगे जंग खाए ताले और पसरी हुई गंदगी इस बात की गवाही दे रहा है कि विभाग के लिए यह चौकी अब केवल कागजों पर ही अस्तित्व में है।
यहां तैनात रहने वाले वनकर्मियों की अनुपस्थिति ने तस्करों का मनोबल बढ़ा दिया है। चेकनाका बंद होने का सीधा लाभ वन माफिया उठा रहे हैं।
स्थानीय लोगों की मानें तो रात के अंधेरे में वन संपदा की चोरी बढ़ गई है। जब सुरक्षा का मुख्य द्वार ही खुला (या लावारिस) पड़ा हो, तो अवैध परिवहन को रोकने वाला कोई नहीं बचा।
इस चेकनाका के शिथिल होने के पीछे क्या कारण है, यह विभागीय कर्मी भी ठीक से नहीं बता पा रहे हैं। गोकुलपुर चेकनाका की यह स्थिति वन विभाग की घोर लापरवाही को उजागर करती है।
यदि समय रहते इस सुरक्षा पोस्ट को पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ना निश्चित है। आला अधिकारियों को इस 'सोते हुए तंत्र' को जगाने की सख्त जरूरत है। इस संबंध में डीएफओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में, तस्करों की चांदी
गोकुलपुर चेकनाका क्षेत्र का वह रणनीतिक बिंदु है जहां से अवैध लकड़ी और खनिज का परिवहन रोका जाता था, लेकिन वर्तमान समय में यहां न कोई गार्ड है और न ही कोई निगरानी।
चौकी पर लटके ताले और परिसर में पसरा धूल चीख-चीख कर कह रही है कि विभाग को जंगल की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं है।
आखिर किसके आदेश पर इस महत्वपूर्ण नाके को लावारिस छोड़ा गया है? क्या इसके पीछे वन विभाग के अधिकारियों और तस्करों की कोई गुप्त सांठगांठ है? यह जांच का विषय हो सकता है।
इस मामले में केवल निचले स्तर के गार्ड ही नहीं, बल्कि रेंजर और डीएफओ स्तर के अधिकारी भी कटघरे में हैं। क्या उच्च अधिकारियों को इस बंद पड़े नाके की जानकारी नहीं है? या फिर जानबूझकर इस ओर से आंखें मूंद ली गई है, ताकि जंगल की बेशकीमती संपदा को ठिकाने लगाया जा सके?
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ऊंट पकड़ाने के बाद चर्चा में आया था चेकनाका
तत्कालीन रेंजर अनिल कुमार सिंह ने गोकुलपुर चेकनाका में ही 12 जनवरी 2021 को 14 और दो फरवरी 2021 को 15 ऊंट पकड़े थे। ऊंटों को बांग्लादेश ले जाया जा रहा था। ऊंटों को पकड़ने के बाद गोकुलपुर चेकनाका चर्चा में आ गया था।
इसे महत्वपूर्ण चेकनाका के रुप में देखा जाता था, लेकिन वर्तमान समय में वन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते चेकनाका शिथिल पड़ गया है। डीएफओ सहित अन्य कोई भी अधिकारी चेकनाका के बंद होने का सटीक कारण नहीं बता पा रहे हैं।
कर्मी की कमी है। जिले में कुल चार चेकनाका है। तीन चालू अवस्था में है। गोकुलपुर चेकनाका में रात में कर्मी रहता है। अगर नहीं रहता है तो कार्रवाई होगी।
बबलू कुमार देहरी, वनपाल, पाकुड़