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    पलामू में दुर्घटना मुआवजा मामले में देरी पर DLSA की सख्ती, पुलिस को 30 दिन में रिपोर्ट देना जरूरी

    Updated: Sat, 02 May 2026 12:02 PM (IST)

    जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) ने सड़क दुर्घटना मुआवजा मामलों में देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस को अब 30 दिनों के भीतर सभी आवश्यक कागजात प्रस ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। सड़क दुर्घटना मामलों में मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) ने सख्त रुख अपनाया है।

    शुक्रवार को डीआरडीए हाल में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में न्यायिक अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि दुर्घटना के 30 दिनों के भीतर सभी आवश्यक कागजात प्रस्तुत करना पुलिस की कानूनी बाध्यता है, इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    कार्यशाला का उद्घाटन अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम अखिलेश कुमार, डीएलएसए सचिव राकेश रंजन, एसडीपीओ राजीव रंजन, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के चीफ अमिताभ चंद सिंह, डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय आदि ने संयुक्त रूप से किया।

    मुख्य अतिथि अखिलेश कुमार ने कहा कि मोटर वाहन दुर्घटना मामलों में समय पर रिपोर्ट और दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलने में देरी होती है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि एक्सीडेंट के 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है, जबकि तीन माह के भीतर 159 एमवी एक्ट के तहत प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

    उन्होंने बताया कि हिट एंड रन मामलों में मृत्यु पर दो लाख और गंभीर रूप से घायल होने पर 50 हजार रुपये मुआवजा का प्रावधान है। साथ ही 164 और 166 एमवी एक्ट के तहत क्लेम प्रक्रिया, एआईआर व डीएआर की भूमिका और सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णयों की भी जानकारी दी।

    डीएलएसए सचिव राकेश रंजन ने कहा कि एफआईआर की प्रति 48 घंटे के भीतर ट्रिब्यूनल, बीमा कंपनी और डीएलएसए को भेजना अनिवार्य है। उन्होंने वाहन बीमा को जरूरी बताते हुए कहा कि बिना बीमा के मामलों में दायित्व और बढ़ जाता है।

    एसडीपीओ राजीव रंजन ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। उन्होंने सभी प्रखंडों में सड़क सुरक्षा कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया। कार्यशाला में बीमा कंपनी के अधिवक्ताओं ने बताया कि करीब 80 प्रतिशत दुर्घटनाएं हेलमेट नहीं पहनने के कारण होती हैं।

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    उन्होंने व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न थानों के पुलिस पदाधिकारी, पैनल अधिवक्ता, पीएलवी व अन्य संबंधित लोग मौजूद रहे।

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