Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    झारखंड में अंबा प्रसाद के तेवर से बैकफुट पर कांग्रेस, पिता की गिरफ्तारी और घर टूटने पर भड़कीं पूर्व विधायक

    Updated: Sat, 28 Mar 2026 11:10 AM (IST)

    झारखंड में कांग्रेस नेता अंबा प्रसाद के तीखे तेवर ने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी है। पिता योगेंद्र साव पर हुई कार्रवाई के बाद अंबा ने संगठन और सरकार पर ...और पढ़ें

    HighLights

    1. अंबा प्रसाद ने कांग्रेस संगठन-सरकार पर साधा निशाना।

    2. पिता योगेंद्र साव पर कार्रवाई के बाद लगातार बयानबाजी।

    3. प्रदेश के बड़े कांग्रेस नेता इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड की सियासत में इन दिनों कांग्रेस एक जटिल और असहज स्थिति से गुजर रही है। हजारीबाग के बड़कागांव से पार्टी की पूर्व विधायक और राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद के तीखे तेवरों ने दल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर हलचल बढ़ा दी है।

    अंबा बंगाल चुनाव में कांग्रेस की सह प्रभारी भी हैं। उनके पिता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के विरुद्ध हुई कार्रवाई के बाद से जहां कांग्रेस रक्षात्मक मुद्रा में है, वहीं अंबा प्रसाद का आक्रामक और बेबाक रुख पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है।

    विपक्ष को हमला करने का मौका मिल रहा

    अंबा प्रसाद लगातार ऐसे बयान दे रही हैं, जिनसे न केवल विपक्ष को हमला करने का मौका मिल रहा है, बल्कि कांग्रेस संगठन और सरकार की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ रही है।

    उन्होंने जिस तरह से खुलकर अपनी बात रखी है, उससे यह स्पष्ट हो रहा है कि वह दबाव में आने के बजाय राजनीतिक लड़ाई को और तेज करने के मूड में हैं। योगेंद्र साव पर हुई कार्रवाई ने पहले ही कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया था।

    खबरें और भी

    अंबा ने बगैर उन्हें नोटिस दिए दल से निकालने पर गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी के सामने यह चुनौती है कि वह एक ओर कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया का समर्थन करे, वहीं दूसरी ओर अपने ही वरिष्ठ नेता के प्रति सहानुभूति भी बनाए रखे। इस द्वंद्व के बीच अंबा प्रसाद के तेवरों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

    चुप्पी साधी कांग्रेस नेताओं ने

    कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस पूरे मामले में सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। यह रणनीतिक चुप्पी इस बात का संकेत है कि कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे को लेकर एकरूपता नहीं है।

    अंदरखाने यह चर्चा भी तेज है कि इस विवाद का असर आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है, खासकर तब जब राज्य में गठबंधन सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है। विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को मुद्दा बनाकर सरकार की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है।

    इस घटनाक्रम का एक बड़ा पहलू यह भी है कि यह केवल एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कांग्रेस की आंतरिक राजनीति, नेतृत्व की पकड़ और गठबंधन की स्थिरता से जुड़ा सवाल बनता जा रहा है।

    आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस स्थिति को कैसे संभालती है। क्या पार्टी अंबा प्रसाद के तेवरों को संतुलित करने की कोशिश करेगी या फिर संयमित रहकर मामले को शांत करने की रणनीति अपनाएगी।

    यह भी पढ़ें- बुलडोजर एक्शन: कड़ी सुरक्षा में NTPC विस्तार के लिए पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का घर ढहाया, हजारीबाग में मचा सियासी घमासान

    यह भी पढ़ें- 'झारखंड की DGP का नाम तदाशा नहीं हताशा मिश्रा होना चाहिए', ये क्या बोल गईं कांग्रेस नेता अंबा प्रसाद

    यह भी पढ़ें- न्यायालय की फटकार से चलती है झारखंड सरकार, भाजपा के आरोप को कांग्रेस ने बताया अनर्गल प्रलाप