हवा में घंटों मंडराता रहा हेलीकॉप्टर, लैंडिंग करते ही हो गया क्रैश... जब मौत को छूकर लौटे थे पूर्व CM
बारामती प्लेन क्रैश की खबर से झारखंड के पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा के 2012 हेलीकॉप्टर हादसे की यादें ताजा हो गईं। 9 मई 2012 को खरसावां में लैंडिंग के दौर ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रदीप सिंह, रांची। बारामती में अजित पवार से जुड़े प्लेन क्रैश की खबर जैसे ही सामने आई, झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक पुरानी, लेकिन सिहरन पैदा कर देने वाली याद ताजा हो गई।
तारीख थी नौ मई 2012, जब झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा मौत से चंद कदमों की दूरी पर खड़े थे। वह हादसा, जिसने न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया था।
मुख्यमंत्री की उड़ान, जो मंज़िल तक नहीं पहुंच सकी
नौ मई 2012 की सुबह मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा रांची से खरसावां के लिए रवाना हुए थे। उनके साथ थीं पत्नी मीरा मुंडा, विधायक बड़कुंवर गगराई, दो पायलट और सुरक्षा कर्मी। मौसम सामान्य था, लेकिन किसे पता था कि कुछ ही देर में यह यात्रा उनकी जिदगी की सबसे बड़ी परीक्षा बन जाएगी।
खरसावां में लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी सामने आई। लैंडिंग में सहायता करने वाला राउटर सिस्टम अचानक फेल हो गया। पायलट ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत भांप लिया। खरसावां में लैंडिंग अब जोखिम भरी हो चुकी थी।
फैसला जो जान बचा गया
बताते हैं कि अर्जुन मुंडा के सुझाव पर पायलट ने साहसिक निर्णय लिया और हेलिकॉप्टर को वापस रांची मोड़ दिया गया। भगवान बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के आसपास हेलिकॉप्टर चक्कर काटने लगा। वजह साफ थी कि अगर ईंधन भरा रहता और क्रैश लैंडिंग होती, तो नुकसान और भी भयावह होता।
आसमान में हर चक्कर के साथ नीचे कुछ लोग सांसें थामे हुए थे। आखिरकार जब ईंधन लगभग समाप्त हो गया, तब पायलट ने क्रैश लैंडिंग का फैसला किया।
क्रैश लैंडिंग होते ही हेलिकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चारों ओर आग और धुएं का गुबार फैल गया। हादसे में मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा गंभीर रूप से घायल हो गए।
उनका एक हाथ बुरी तरह झुलस गया। अन्य यात्री भी चोटिल हुए, लेकिन सबसे ज्यादा चिंता मुख्यमंत्री की हालत को लेकर थी।
एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। उन्हें सुरक्षा बलों ने इरबा स्थित अपोलो अस्पताल (अब मेदांता) पहुंचाया। जब उन्हें स्ट्रेचर पर अस्पताल के अंदर ले जाया जा रहा था तो यह संवाददाता भी उपस्थित था।
चार महीने से अधिक चला इलाज
अर्जुन मुंडा को पूरी तरह ठीक होने में चार महीने से अधिक का समय लगा। इलाज लंबा और तकलीफदेह था। लेकिन इस दौरान उन्होंने शासन संभाले रखा। वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उनके मंत्रिपरिषद में उपमुख्यमंत्री थे।
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उस समय कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास ही अस्थायी सचिवालय बन गया। मंत्रिपरिषद की बैठकें वहां होने लगी। फाइलें वहीं आतीं, फैसले वहीं होते। डॉक्टरों का एक विशेष दल 24 घंटे मुख्यमंत्री आवास में तैनात रहा।
इस हादसे के बाद वीवीआइपी हवाई सुरक्षा, हेलिकॉप्टरों की तकनीकी जांच और उड़ान प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल उठे।
बारामती के प्लेन क्रैश की खबर ने उस दिन की सारी तस्वीरें फिर आंखों के सामने ला दीं, जब झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा मौत को मात देकर वापस लौटे थे।
यह सिर्फ एक हादसा नहीं था, बल्कि हिम्मत, निर्णय और नेतृत्व की ऐसी कहानी थी, जिसने इतिहास में अपनी अलग जगह बना ली। कहते हैं कि
आसमान कभी-कभी सत्ता और शक्ति की भी परीक्षा लेता है और नौ मई 2012 को अर्जुन मुंडा उस परीक्षा में खरे उतरे थे।
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