असम चुनाव बना झारखंड की राजनीति का नया रणक्षेत्र, चुनाव प्रचार में उतरी हेमंत सोरेन की टीम
झारखंड की राजनीति का ध्यान अब असम विधानसभा चुनाव पर केंद्रित हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो ने 18 सीटों पर उम्मीदवार उतारे ह ...और पढ़ें
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असम के कोकराझार में सभा को संबोधित करते हेमंत सोरेन। फोटो- झामुमो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, रांची। असम विधानसभा चुनाव के साथ झारखंड की राजनीति का फोकस तेजी से पूर्वोत्तर की ओर शिफ्ट होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से 18 सीटों पर प्रत्याशी उतारकर चुनावी मुकाबले को नई दिशा दे दी है। इसके साथ ही वे अपनी पूरी टीम के साथ असम में कैंप कर रहे हैं, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि चुनाव तक झारखंड के कई प्रमुख नेता राज्य से बाहर सक्रिय रहेंगे।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के इस आक्रामक विस्तारवादी रुख ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। मुख्यमंत्री लगातार सभाएं, रोड शो और रणनीतिक बैठकों के जरिए स्थानीय स्तर पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की सक्रियता के जवाब में भाजपा ने भी रणनीतिक कदम उठाया है। पार्टी ने झारखंड के कई नेताओं को असम में प्रचार के लिए भेजने का फैसला किया है।
भाजपा की झामुमो के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश
खास तौर पर उन इलाकों पर फोकस किया जा रहा है, जहां हेमंत सोरेन खुद सक्रिय हैं। भाजपा की कोशिश है कि झामुमो के प्रभाव को सीमित किया जाए और स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक मजबूती का लाभ उठाया जाए। इसके लिए झारखंड के नेताओं को बूथ स्तर तक सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है। यह रणनीति बताती है कि पार्टी इस चुनाव को सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक प्रभाव के रूप में देख रही है।
कांग्रेस ने भी कसी कमर, नेताओं को दिया टारगेट
इधर, कांग्रेस ने भी अपने मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे असम में निर्धारित सीटों पर जीत सुनिश्चित करें। पार्टी आलाकमान ने खास तौर पर यह संदेश दिया है कि जिन नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है, वे अपने प्रभाव और नेटवर्क का पूरा इस्तेमाल करें।
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मंत्रियों ने झारखंड में अपने निर्धारित कार्यक्रम टाल दिए हैं और असम में कैंप करने की तैयारी है। कांग्रेस के भीतर इसे प्रदर्शन आधारित राजनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां नेताओं की सक्रियता और परिणाम दोनों पर नजर रखी जा रही है।
असम चुनाव में झारखंड के नेताओं की यह व्यापक भागीदारी सिर्फ चुनावी प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति का संकेत भी है। यदि झामुमो और सहयोगी दल बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो यह क्षेत्रीय दलों के विस्तार की नई संभावनाएं खोल सकता है।
वहीं, भाजपा और कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। कुल मिलाकर, असम का यह चुनाव अब झारखंड की राजनीति के लिए भी एक अहम परीक्षा बन चुका है, जहां नेताओं की सक्रियता और परिणाम दोनों आने वाले समय की दिशा तय करेंगे।