यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 02, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jharkhand: भूदान की जमीन पर थानेदार का कब्जा, बाबूलाल ने खोला राज; मुख्य सचिव तक भी पहुंचा पत्र
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर राज्य के भू-माफियाओं पर निशाना साधा है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि माफियाओं के साथ स्थानीय पुलिस भी ...और पढ़ें

HighLights
- झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को पत्र में लिख कार्रवाई की मांग की
- महिलौंग में भूदान की जमीन पर पुलिस-प्रशासन के सहयोग से माफिया कर रहे कब्जा
मुख्य सचिव को लिखा पत्र
पोटो हो के वंशजों की जमीन से कब्जा हटाने की मांग
वहीं दूसरी ओर सेरेंगसिया में आयोजित शहीद दिवस समारोह में कोल्हान भूमि बचाओ समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार सावैयां ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पोटो हो के वंशजों की जमीन कब्जे मामले में विभिन्न मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई की मांग की।
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ज्ञापन की एक कॉपी सांसद जोबा मांझी को भी दी। इस दौरान बलिदानी पोटो हो के वंशज जापान पुरती, रमेश पुरती समेत अन्य भी उनके साथ थे।
सावैयां ने ज्ञापन में शिकायत की है कि पट्टाजैंत में पोटो हो के वंशजों की 62 एकड़ पुश्तैनी जमीन है जिस पर देश की आजादी के बाद से ही कुछ दबंगों का कब्जा हो गया।
आज भी इस जमीन पर अवैध कब्जा कायम है। इस मामले में पोटो हो के वंशजों को न्याय दिलाने के लिये मैंने पिछले तीन वर्षों में जगन्नाथपुर अंचल कार्यालय से लेकर उपायुक्त तक को शिकायत पत्र सौंपा।
लेकिन वंशजों को अब तक न्याय नहीं मिला है। यदि किसी कारण जमीन कब्जामुक्त नहीं हो पाती है तो वंशजों को इतनी ही जमीन अन्य जगह पर उपलब्ध कराया जा सकता है।
यदि ऐसा भी नहीं हो पाता है तो जमीन के एवज में वंशजों को एकमुश्त पचास करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाये। वंशजों को जिले के बड़े स्कूल में पढ़ाया जाये। तभी बलिदानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इधर, सीएम को ज्ञापन देने के बाद सावैयां ने बताया कि ज्ञापन के साथ उन्होंने वंशजों की जमीन के खतियान, कुरसीनामा तथा वंशजों के नामों की सूची भी सौंपी है।
उन्होंने बताया कि 45 दिनों के अंदर कार्रवाई नहीं होने पर वंशजों के साथ सीएम आवास पर प्रदर्शन किया जायेगा। बलिदानी पोटो हो के वंशजों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं जायेगी। इस मौके पर वंशज जापान पुरती तथा रमेश पुरती के साथ उनके रिश्तेदार कृष्ण सिंकू, शिवशंकर बालमूचू, सुशील बालमूचू आदि भी मौजूद थे।