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    कभी 22 घोड़ों का अस्तबल था, आज कंप्यूटर से लैस; रांची के इस ऐतिहासिक स्कूल में पढ़ते थे सैनिकों के बच्चे

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 07:59 AM (IST)

    यह लेख रांची के राजकीयकृत मध्य विद्यालय के समृद्ध इतिहास और वर्तमान स्थिति को दर्शाता है, जिसकी स्थापना 1880 में बिहार मिलिट्री पुलिस के बच्चों के लिए ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. 1880 में स्थापित, कभी 22 घोड़ों का अस्तबल था।

    2. अब स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब और सौर ऊर्जा से लैस।

    3. 'सीटी बजाओ 2.0' और बाल संसद जैसी अनूठी पहल।

    जागरण संवाददाता, रांची। बिहार मिलिट्री पुलिस (बीएमपी) की स्थापना 1880 में हुई थी। यहां गोरखा रेजिमेंट की 10 कंपनियां रहती थीं। अर्ध सैनिकों के बच्चों को पढ़ने के लिए एक स्कूल की स्थापना की गई। चार खपरैल के कमरे और छह पक्का कमरे कमरों से यह स्कूल शुरू हुआ था।

    तब स्कूल का कुल परिसर 2.77 एकड़ था। इसमें घोड़ा लाइन, जहां 22 घोड़ों का अस्तबल हुआ करता था। डिबरी (दीया) लाइन, जहां घोड़ों की देखभाल करने वाले सिपाही रहते थे।

    बीएमपी के कमांडेंट की निगरानी में स्कूल का संचालन होता था। तब पांच जनवरी को बीएमपी की स्थापना दिवस के दिन स्कूल दिवस मनाया जाता था। अब स्कूल दिवस मार्च माह में मनाया जाता है। 1976 में बिहार सरकार द्वारा स्कूल का अधिग्रहण किया गया।

    यहां के पूर्व प्राचार्य में सुहैल अनवर (1985), विष्णु माया थापा (1992), सिस्टर मेरी बर्नार्ड (1995), जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा 1996 में सम्मानित किया गया था, भगवान दास (1999) आदि थे। वर्तमान में इसके प्राचार्य अशोक प्रसाद सिंह हैं, जो रांची-2 के निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी भी हैं। यहां एक प्रधानाध्यापक और नौ शिक्षिकाएं कार्यरत हैं।

    शुरुआत से यहां सह-शिक्षा की व्यवस्था रही है। 1985 तक इस स्कूल में करीब 1200 से 1500 छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त करते थे। वर्तमान में या घटकर 200 के करीब रह गया है, जिसमें छात्राएं 60 प्रतिशत और छात्र 40 प्रतिशत है। यहां कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई होती है।

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    विद्यार्थियों की संख्या घटने का मुख्य कारण करीब एक स्क्वायर किलोमीटर में 28 स्कूल का खुलना है, जिसमें ज्यादातर प्राइवेट स्कूल खुले हैं। इस स्कूल में ज्यादातर बच्चे निम्न वर्ग परिवार से हैं। स्कूल में 10 कंप्यूटर, लाइब्रेरी में 1000 से अधिक किताबें हैं। स्कूल में चार स्मार्ट क्लास है। स्कूल में सौर ऊर्जा का प्रबंध है। स्वच्छ पीने का पानी, शौचालय की सुविधा है।

    इंडोर और आउटडोर दोनों खेल की व्यवस्था है। कैरम, लूडो, बैडमिंटन, क्रिकेट, फुटबाल, वालीबाल आदि। स्कूल परिसर में एक ओपन जिम भी है। स्कूल में चार हाउस झारखंड की नदी कोयल, दामोदर, शंख और स्वर्णरेखा है। हाउस के हिसाब से उनका एड्रेस कोड भी अलग-अलग है। कोयल का रेड, दामोदर का ग्रीन, शंख का ब्लू तथा स्वर्णरेखा का येलो है।

    स्कूल में कई कार्यक्रम होते रहते हैं, जिसमें क्विज, निबंध लेखन, वाद-विवाद, पेंटिंग योग आदि। अंग्रेजी सुधारने के लिए वोकैब थान, ग्रुप डिस्कशन कराये जाते हैं। ‘पढ़ो और बढ़ो’ के तहत झारखंड के क्रांतिकारियों पर प्रकाश डालते हैं।

    इस स्कूल में हर माह प्रोजेक्ट टीम द्वारा बच्चों का आकलन किया जाता है तथा प्रोजेक्ट रेल अर्थात रेगुलर असेसमेंट इंप्रूव्ड लर्निंग बच्चों के विकास पर नजर रखती है। प्रत्येक छह माह में एसए1 एसए2 अर्थात योगात्मक मूल्यांकन भी किया जाता है। स्कूल में बाल संसद है।

    संसद में प्रधानमंत्री, उप प्रधानमंत्री, अध्यक्ष तथा पूरी कैबिनेट का चुनाव वोट द्वारा होता है। जो स्टूडेंट स्कूल नहीं आता तो ‘सीटी बजाओ 2.0’ के माध्यम से उसके घर जाकर सीटी बजाई जाती है, ताकि वह स्कूल आएं।

    सरकार द्वारा मिड-डे-मील, किताबें, स्टेशनरी, छात्रवृत्ति, यूनिफार्म स्कूल द्वारा कक्षा एक और दो को तथा तीन से आठ तक यूनिफार्म के लिए उनके अकाउंट में डायरेक्ट पैसा जाता है। कक्षा 8 के बच्चों को साइकिल भी मिलता है। जैक द्वारा आठवीं की बोर्ड की परीक्षा में यहां के छात्र-छात्राओं का परीक्षा फल शत-प्रतिशत रहता है।

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    यहां के पूर्ववर्ती छात्रों में कई कमांडेंट, असिस्टेंट कमांडेंट, सूबेदार, मेजर, सिपाही आदि पदों पर गोरखा रेजीमेंट में अपनी सेवा दे रहे हैं। फुटबाल में सीबी राणा, वॉलीबॉल में प्रयाग छेत्री का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा।

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    डॉ. मोहम्मद ज़ाकिर