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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 28, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jharkhand Election 2024: कौन हैं कांग्रेस के 'स्लीपर सेल' टाइप नेता? चुनाव आते ही टिकट के जुगाड़ में हो जाते हैं सुपर एक्टिव

Published: Mon, 28 Oct 2024 09:58 PM (IST)

कांग्रेस को अपने ही लोगों से नुकसान हो रहा है। पार्टी के सीनियर नेताओं के कहने पर गुप्त तरीके से ...और पढ़ें

कांग्रेस के लिए घातक साबित हो रहे दिल्ली से राजनीति करनेवाले नेता। (फाइल फोटो)
कांग्रेस के लिए घातक साबित हो रहे दिल्ली से राजनीति करनेवाले नेता। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पार्टी के कई नेता अपना क्षेत्र छोड़कर नई दिल्ली में सालों से गुप्त तरीके से काम कर रहे
  2. जमीनी राजनीति से कोई वास्ता नहीं लेकिन टिकट बंटवारे में हिस्सेदारी तय करवाते हैं
  3. जमीनी राजनीति से कोई वास्ता नहीं लेकिन टिकट बंटवारे में हिस्सेदारी तय करवाते हैं

आशीष झा, रांची। कांग्रेस को अपने ही लोगों से नुकसान होने लगा है। खासकर उन लोगों से जो पार्टी के सीनियर नेताओं के कहने पर गुप्त तरीके से पार्टी का काम कर रहे होते हैं। बिल्कुल स्लीपर सेल की तरह। ये नेता जमीनी राजनीति से दूरी बरतते हुए नई दिल्ली में सालोंसाल कैंप किए रहते हैं। इन्हीं नेताओं के जिम्मे टिकटों के बंटवारे और गठबंधन में हिस्सेदारी की बात सामने आ जाती है।

गुप्त तरीके से काम कर रहे इन नेताओं ने कांग्रेस का बंटाधार करने में कोई कसर भी नहीं छोड़ी है। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर अचानक से नेताओं को टिकट थमा दिया जाता है। हाल की कुछ घटनाएं इन्हीं बातों को रेखांकित करती हैं।

पार्टी ने छतरपुर से राधाकृष्ण किशोर को टिकट देने का फैसला किया और इसके एक दिन पूर्व ही उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई।

तमाम गतिविधियों के पीछे दिल्ली के सीनियर नेताओं का हाथ रहा है। दिल्ली के यही नेता दूसरे दलों से उम्मीदवारों का आयात करते हैं और उन्हें टिकट की गारंटी दिलाते हैं।

इन नेताओं की इतनी अधिक चलती है कि धरातल पर काम करनेवाले लोगों की कई बार पूछ तक नहीं होती। इन्हीं नेताओं की बदौलत कुछ लोगों को बार-बार टिकट मिल जाता है, भले ही वो हर बार हार का मुंह देखते रहे हों।

इस तरह के उम्मीदवारों के कई उदाहरण झारखंड में पटे पड़े हैं जो बार-बार हारने के बाद भी उम्मीदवार बन जाते हैं। कभी लोकसभा से तो कभी विधानसभा से। ऐसे उम्मीदवारों को सीट बदलने का मौका भी नई दिल्ली के ऐसे ही सूत्रों के माध्यम से मिलता है।

कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि ऐसे नेताओं की केंद्रीय कोर टीम में अच्छी पकड़ रहती है और लगातार दिल्ली की गतिविधियों में शामिल रहने का उन्हें फायदा मिलता है।

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