झारखंड: जनता ने मांगी थी 2 मिनट की स्टॉपेज, रेलवे ने डेढ़ माह से खड़ी कर रखी है ट्रेन; चौंकाने वाली है वजह
खलारी के लोगों ने रांची-नई दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस के ठहराव की मांग की थी। रेलवे ने ठहराव तो नहीं दिया, लेकिन डेढ़ महीने से पूरी गरीब रथ रैक को ही खल ...और पढ़ें

खलारी स्टेशन पर खड़ी गरीब रथ। फोटो जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संसू जागरण, खलारी। कहते हैं कि मांगो तो दिल खोलकर मांगो, क्या पता सरकार सुन ही ले। खलारी के लोगों ने वर्षों से रांची-नई दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस के ठहराव की मांग की थी। रेलवे ने भी जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया कि लोग भावुक हो गए।
ट्रेन का ठहराव तो नहीं हुआ, लेकिन पूरा का पूरा गरीब रथ का रैक ही पिछले डेढ़ महीने से खलारी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक पर खड़ा कर दिया गया है। अब लोग ट्रेन पकड़ें या नहीं, कम से कम रोज दर्शन तो कर ही सकते हैं।
रेल अधिकारियों का कहना है कि यार्ड में जगह नहीं थी, इसलिए रैक को खलारी स्टेशन पर खड़ा किया गया है। मगर खलारी के लोग इसे रेलवे की ‘विशेष कृपा’ मान रहे हैं।
कुछ लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा कि ‘रेलवे ने ठहराव की मांग को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया, अब पूरा रैक ही स्थायी रूप से भेज दिया गया है।’
सालों पुरानी है ठहराव की मांग
वर्षों से स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि रांची-नई दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस के ठहराव की मांग करते आ रहे हैं। स्थानीय सांसद भी सत्ताधारी दल के हैं और केंद्र में भी वही सरकार है, इसलिए लोगों की उम्मीदें समय-समय पर नई चमक के साथ जागती रहती हैं।
हालांकि ट्रेन अब तक नहीं रुकी, लेकिन उसका रैक जरूर रुक गया है, और वह भी पूरे आत्मविश्वास के साथ। लोगों का कहना है कि टोरी से डेहरी आन सोन तक गरीब रथ एक्सप्रेस के सात ठहराव हैं।
कहीं 15 किलोमीटर पर स्टेशन है, कहीं 19 और कहीं 28 किलोमीटर पर भी ट्रेन रुक जाती है। मगर खलारी शायद रेलवे के नक्शे में कोई ‘अति विशेष’ जगह है, जहां ट्रेन रुकने के बजाय केवल खड़ी रहना पसंद करती है।
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खलारी की अहमियत भी कम नहीं है। यहां अरबों रुपये का राजस्व देने वाले उद्योग हैं, हजारों केंद्रीय कर्मी परिवार सहित रहते हैं और आसपास के रांची, हजारीबाग तथा चतरा जिले के लोग भी इस स्टेशन से लाभान्वित हो सकते हैं।
इसके बावजूद यात्रियों को गरीब रथ पकड़ने के लिए 70 किलोमीटर दूर रांची या 50 किलोमीटर दूर टोरी जाना पड़ता है। फिलहाल खलारी के लोगों ने स्थिति से समझौता कर लिया है। ट्रेन नहीं तो उसका रैक ही सही।
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