इसलिए दिया 'मेगाबुरु' नाम: सारंडा के जंगल में 65 माओवादियों की थी सूचना, मिसिर बेसरा कर रहा है नेतृत्व
Jharkhand कोल्हान के सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों ने 'ऑपरेशन मेगाबुरु' के तहत माओवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए ...और पढ़ें

झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ का इतिहास में सबसे बड़ा अभियान। (फोटो सोर्स: पुलिस)
HighLights
कुख्यात अनल के दस्ते में थे 20 माओवादी, 15 शव मिले हैं।
झारखंड में माओवादी खात्मे का यह सबसे बड़ा अभियान।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में माओवादियों के विरुद्ध सुरक्षा बलों की निर्णायक कार्रवाई जारी है। पुलिस और सीआरपीएफ को खुफिया सूचना मिली थी कि सारंडा में कुल 65 माओवादियों का एक सक्रिय दस्ते मौजूद है, जिसका नेतृत्व पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर कर रहा है। इन माओवादी समूहों में एक करोड़ रुपये के इनामी अनल के नेतृत्व में करीब 20 माओवादी शामिल थे।
गुरुवार की सुबह सुरक्षा बलों और अनल के दस्ते के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में अब तक 15 माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभियान अभी जारी है और सर्च ऑपरेशन के दौरान और शव मिलने की संभावना है। अधिकारी यह भी बता रहे हैं कि मारे जाने वाले माओवादियों की संख्या बढ़ सकती है।
माओवादियों के मारे जाने वाले इस दस्ते में कई कुख्यात सदस्य शामिल थे। इन माओवादी नेताओं पर झारखंड और ओडिशा सरकारों के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने भी इनाम रखा हुआ था। राज्य में अभी भी दो बड़े इनामी माओवादी सक्रिय हैं, जो कि मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर और असीम मंडल उर्फ आकाश हैं। झारखंड पुलिस का अनुमान है कि पूरे राज्य में छोटे-बड़े माओवादियों की संख्या लगभग 50 बची हुई है, जिनकी तलाश जारी है।
आज की मुठभेड़ के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बचे हुए माओवादियों से मुख्य धारा में लौटने की अपील की है। शाह ने कहा- दशकों से भय और आतंक के पर्याय रहे नक्सलवाद को हम 31 मार्च 2026 से पहले समाप्त करने के लिए संकल्पित हैं।
ऑपरेशन मेगाबुरु का नाम कैसे पड़ा
इस अभियान का नाम इलाके के नाम से रखा गया। जहां यह अभियान चला, उस जगह का नाम मेघाहातूबुरू है। सुरक्षा बलों ने इसे अंग्रेजी और हिंदी के संयोजन से ‘मेगाबुरु’ नाम दिया।
- मेगा का मतलब है बड़ा
- बुरु का मतलब है पहाड़
इस प्रकार, मेगाबुरु का अर्थ हुआ- बड़े पहाड़ पर चलने वाला अभियान। यह अभियान झारखंड में माओवादी खात्मे के इतिहास में सबसे बड़ा और निर्णायक माना जा रहा है।
सुरक्षा बलों का कहना है कि इस अभियान से माओवादी गतिविधियों की कमर टूट चुकी है। झारखंड पुलिस ने शेष माओवादियों से अपील की है कि वे आत्मसमर्पण करें और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास योजना का लाभ उठाएं। पूरे सारंडा क्षेत्र में सुरक्षा बलों का सर्च अभियान अभी भी जारी है।