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    गठबंधन में दरार! झामुमो-कांग्रेस में तनातनी के बीच विधायकों का मूड जानने आ रांची रहे तेजस्वी; झारखंड में चल क्या रहा?

    Updated: Fri, 03 Apr 2026 09:47 AM (GMT+05:30)

    झारखंड में झामुमो और कांग्रेस गठबंधन के भीतर तनाव बढ़ रहा है, जो असम चुनाव में तालमेल की विफलता और कांग्रेस की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं के कारण है। राजद ...और पढ़ें

    HighLights

    1. झामुमो-कांग्रेस गठबंधन में आंतरिक तनाव बढ़ रहा है।

    2. असम चुनाव में तालमेल न बनने से मतभेद उभरे।

    3. तेजस्वी यादव विधायकों का मूड जानने रांची आ रहे।

    प्रदीप सिंह, रांची। झारखंड की राजनीति में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस का गठबंधन लंबे समय से सत्ता की धुरी रहा है। 2024 में संपन्न विधानसभा चुनाव के बाद महागठबंधन ने 81 में से 56 सीटें जीतकर मजबूत बहुमत हासिल किया था, जिसमें झामुमो के 34 और कांग्रेस के 16 विधायक शामिल हैं।

    हालांकि, हालिया घटनाक्रम इस स्थिर दिखने वाले समीकरण के भीतर उभरती दरारों की ओर संकेत कर रहे हैं। सवाल उठने लगा है कि यह केवल सामान्य राजनीतिक दबाव है या गठबंधन किसी गहरे अंतर्विरोध की ओर बढ़ रहा है।

    उधर राजनीतिक गलियारे में तेजी से बढ़ रही सुगबुगाहट को देखते हुए गठबंधन का तीसरा अहम सहयोगी राष्ट्रीय जनता (राजद) भी सतर्क है। विधायकों का मूड भांपने के लिए पार्टी नेता तेजस्वी यादव पांच अप्रैल को रांची आ रहे हैं। राजद के पास चार विधायक हैं और इस लिहाज से सत्ता संतुलन में उसकी अहम भागीदारी है।

    असम विधानसभा चुनाव को लेकर मतभेद बढ़ा

    ताजा राजनीतिक घटनाओं में असम विधानसभा को लेकर झामुमो और कांग्रेस के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। दोनों दलों की तत्परता के बावजूद सीटों के तालमेल पर बात नहीं बनी तो झामुमो ने कड़ा निर्णय लेते हुए प्रत्याशी उतार दिए।

    इसपर झामुमो की ओर से कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को लेकर टिप्पणी की गई तो कांग्रेसी खेमे में भी सुगबुगाहट हुई। सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर ऊंगली उठाए।

    पार्टी समन्वय समिति और 20 सूत्री कमेटियों के गठन को लेकर दबाव बना रही है, जबकि झामुमो गठबंधन में अपने राजनीतिक वर्चस्व को बनाए रखने के पक्ष में दिख रहा है। यह स्थिति बताती है कि गठबंधन के भीतर साझा सत्ता और वास्तविक नियंत्रण के बीच संतुलन डगमगाने लगा है।

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    जूनियर पार्टनर होने के बावजूद कांग्रेस की बढ़ती महत्वाकांक्षा

    झारखंड में गठबंधन की संरचना स्पष्ट रूप से झामुमो केंद्रित रही है, जहां मुख्यमंत्री पद पार्टी के पास है और कांग्रेस जूनियर पार्टनर की भूमिका में है। झामुमो हमेशा यह कहता रहा है कि गठबंधन में उसकी भूमिका बड़े भाई की है।

    यही असंतुलन समय-समय पर असंतोष को जन्म देता है। कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर खुद को पुनर्स्थापित करने की कोशिश में है और राज्य में अपनी भूमिका और निर्णय व नीतियों में अधिक भागीदारी चाहती है। उधर झामुमो एक प्रभावी क्षेत्रीय दल होने के नाते अपने राजनीतिक आधार और नेतृत्व नियंत्रण को कमजोर नहीं होने देना चाहता।

    यही अंतर्विरोध गठबंधन की सबसे बड़ी संरचनात्मक चुनौती बनता जा रहा है। गठबंधन के भीतर खिंचाव का एक बड़ा कारण चुनावी रणनीति भी है। अन्य राज्यों में अलग-अलग रास्ते अपनाने के संकेत यह दर्शाते हैं कि दोनों दल हर परिस्थिति में एक-दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहते।

    आगामी राज्यसभा चुनाव में भी टकराव की आशंका है। खाली दो सीटों पर झामुमो ने दावेदारी की है, जबकि एक सीट लेने की कोशिश में कांग्रेस है।

    शीर्ष नेतृत्व साथ चलने का हिमायती

    मौजूदा परिस्थितियों को सीधे संकट कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन इसे तनावपूर्ण चरण जरूर कहा जा सकता है। झामुमो की ओर से संवाद के जरिए मतभेद सुलझाने की बात यह संकेत देती है कि गठबंधन को बनाए रखने की इच्छा अभी भी मौजूद है। साथ ही, भाजपा जैसे मजबूत विपक्ष की मौजूदगी भी दोनों दलों को साथ रहने के लिए मजबूर करती है।

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