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    झारखंड में अस्पतालों के लिए जारी हुआ 'कलर कोड': मरम्मत से लेकर दवा तक, सिविल सर्जन के हाथ में पावर; 120 करोड़ रुपये मंजूर

    Updated: Mon, 27 Apr 2026 07:24 PM (IST)

    झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना के तहत 120 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। यह राशि अस्पतालों के रंगरोगन ...और पढ़ें

    अस्पतालों को श्रेणी के अनुसार प्रतिवर्ष मिलते हैं दो लाख से 75 लाख रुपये।

    अस्पतालों को श्रेणी के अनुसार प्रतिवर्ष मिलते हैं दो लाख से 75 लाख रुपये।

    HighLights

    1. अस्पतालों के संचालन और रखरखाव के लिए 120 करोड़ मंजूर।

    2. रंगरोगन, पेयजल, स्वच्छता, बिजली और उपकरणों पर होगा खर्च।

    3. प्रत्येक अस्पताल को श्रेणी अनुसार मिलेगा निर्धारित अनटायड फंड।

    राज्य ब्यूरो, रांची। स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 120 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।

    इस राशि से सभी श्रेणी के अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों को अनटायड फंड के रूप में निर्धारित राशि प्राप्त होगी। अस्पतालों में यह राशि अस्पतालों के रंगरोगन, पेयजल, स्वच्छता, बिजली एवं अन्य आकस्मिक कार्यों के अलावा दवा एवं जरूरी उपकरणों पर खर्च की जा सकेगी।


    इस योजना के तहत प्रत्येक सदर अस्पताल को प्रतिवर्ष 75 लाख, अनुमंडल अस्पतालों को 50 लाख, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को 10 लाख, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को पांच लाख तथा स्वास्थ्य उपकेंद्रों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को दो लाख रुपये दिए जाते हैं।

    यह राशि खर्च करने का अधिकार सदर अस्पतालों के मामलों में सिविल सर्जन तथा अन्य के मामले में संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के पास होगा। विभाग ने इस योजना के तहत सभी श्रेणी के अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों के रंगरोगन के लिए रंग भी निर्धारित कर दिए हैं।

    इसके तहत सदर अस्पतालों को सफेद, अनुमंडल अस्पतालों को हल्का पीला, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का हल्का गुलाबी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हल्का नीला तथा स्वास्थ्य उपकेंद्रों व आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को यलो मेटालिक रंग में रंगा जाना है।

    विभाग ने योजना के तहत राशि की प्रशासनिक स्वीकृति देते हुए इसे खर्च करने को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बताते चलें कि इस योजना का उद्देश्य अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों को जरूरी कार्यों के लिए विभाग पर निर्भरता कम करना है। इसके बेहतर परिणाम भी आए हैं। इसे ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी इस योजना को जारी रखने का निर्णय लिया गया।

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