TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: देशभर के लाखों शिक्षकों की बढ़ी धड़कनें, क्या जाएगी नौकरी?
आरटीई अधिनियम 2009 से पहले नियुक्त प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर पुनर्विचार याचिकाओं पर निर्णय आज आ सकत ...और पढ़ें
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टीईटी अनिवार्यता पर सर्वोच्च न्यायालय शिक्षकों की निगाहें टिकीं। (फोटो: सांकेतिक)
HighLights
सर्वोच्च न्यायालय पुनर्विचार याचिकाओं पर लेगा निर्णय।
आरटीई पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता।
देशभर के शिक्षक संघ फैसले का कर रहे इंतजार।
राज्य ब्यूरो, रांची । राज्य में निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई) लागू होने से पूर्व कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय के ऊपर टिकी हैं।
इन शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) उत्तीर्ण होने के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध विभिन्न राज्यों तथा शिक्षक संघों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल पुनर्विचार याचिका पर मंगलवार को कुछ न कुछ आदेश आ सकता है।
बताया जाता है कि पुनर्विचार याचिका के तहत संबंधित न्यायाधीश अपने चेंबर में पिटीशन में रखे गए तथ्यों को देखेंगे, जिसके बाद अपने आदेश को बरकरार रखने या सुनवाई करने का अपना निर्णय सुनाएंगे।
इसमें याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को पक्ष रखने की अनुमति नहीं होगी। कोर्ट सुनवाई को तैयार होता है तब ही उसमें अधिवक्ता याचिकाकर्ताओं का पक्ष रख सकेंगे।
सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष पारित अपने एक आदेश में आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त उन प्राथमिक शिक्षकों के लिए भी टेट उत्तीर्ण होना अनिवार्य किया है, जिनकी सेवा पांच वर्ष से अधिक बची है।
इसके लिए शिक्षकों को दो वर्ष का समय दिया गया है। इस अवधि में टेट उत्तीर्ण नहीं होने पर राज्य सरकारों उन्हें सेवा से हटा सकेंगी। साथ ही शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए भी यह परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा।
यह उन शिक्षकों पर लागू होगा जिनकी सेवा पांच वर्ष से कम बची है। इधर, देशभर के प्राथमिक शिक्षक इसे लागू नहीं करने की मांग कर रहे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश के विरुद्ध कुल 40 पुनर्विचार याचिका दाखिल हुई है, जिनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बंगाल, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, केरल, मेघालय तथा ओडिशा राज्य की सरकारों भी सम्मिलित हैं।
झारखंड की बात करें तो यहां से एकमात्र याचिका अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से दाखिल की गई है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर के भी कई संघों ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। इन्हीं याचिकाओं पर एक साथ मंगलवार को विचार किया जाएगा।
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