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    पेपर लीक मामले में अब तक 157 को जमानत, चेक बाउंस केस में व्यापारी ने किया सरेंडर; झारखंड क्राइम की बड़ी खबरें 

    Updated: Sun, 17 May 2026 12:21 AM (IST)

    रांची में उत्पाद सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले में 3 और आरोपियों को जमानत मिली, कुल 157 को राहत। चेक बाउंस मामले में एक दवा व्यवसायी ने सरेंडर किया, जबक ...और पढ़ें

    झारखंड क्राइम से जुड़ी खबरें। सांकेतिक फोटो

    झारखंड क्राइम से जुड़ी खबरें। सांकेतिक फोटो

    HighLights

    1. उत्पाद सिपाही पेपर लीक में 157 को मिली जमानत।

    2. चेक बाउंस मामले में दवा व्यवसायी ने किया सरेंडर।

    3. सेना में नौकरी ठगी के आरोपी की जमानत खारिज।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के आरोपित तीन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने शनिवार को उत्तम कुमार, अल्फाज खान और रामजी अंसारी की याचिका स्वीकार करते हुए जमानत प्रदान की। पूर्व में 154 को जमानत मिल चुकी है।

    जेल में बंद छह आरोपितों की याचिका पर 21 मई को सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता रंजीत कुमार के अधिवक्ता शिशिर राज ने जानकारी दी कि तीनों का आपराधिक इतिहास रिपोर्ट नहीं पहुंचने कारण सुनवाई टल गई। अदालत ने अगली सुनवाई 21 मई निर्धारित की है।

    मामले में रंजीत कुमार, बुलबुल पांडे उर्फ अमृत राज, योगेश प्रसाद, विकास कुमार, आशीष कुमार और गुलाब चंद महतो ने जमानत की गुहार लगाई है।

    बता दें कि यह मामला तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज से जुड़ा है, जहां पुलिस छापेमारी के दौरान पेपर लीक और सौदेबाजी के संगठित रैकेट का खुलासा हुआ था।

    जांच में सामने आया था कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटवाए जा रहे थे और इसके बदले मोटी रकम वसूली जा रही थी।

    चेक बाउंस मामले में दवा व्यवसायी ने किया सरेंडर

    न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत में चेक बाउंस मामले में शनिवार को महालक्ष्मी ट्रेडर्स के संचालक और दवा व्यवसायी उमा शंकर प्रसाद ने सरेंडर किया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेज दिया गया।

    अभियुक्त के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी था। मामले में अदालत ने पूर्व में 30 जून 2025 को दो वर्ष की सजा और 36 लाख रुपये आर्थिक दंड सुनाया था। इसके खिलाफ अपील को न्यायायुक्त की अदालत ने इस साल की 17 फरवरी को खारिज करते हुए सजा और आर्थिक दंड को बरकरार रखा।

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    अदालत ने अपील खारिज करते हुए अभियुक्त को न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। लेकिन सरेंडर नहीं किया। इसके बाद वारंट जारी किया गया।

    अभियोजन के अनुसार, मीरा चौधरी से वर्ष 2015 में करीब 24 लाख रुपये लिया था। बदले में चेक दिया। रुपये लौटाने के नाम पर टालमटोल किए जाने के बाद वर्ष 2020 में चेक बाउंस का मामला दर्ज कराया था।

    सेना में नौकरी देने के नाम पर ठगी करने वाले को नहीं मिली जमानत

    अपर न्यायायुक्त संजीव झा की अदालत ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोपित अरविंद प्रसाद की जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला चुटिया थाना से जुड़ा है। अरविंद प्रसाद 11 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में है।

    अभियोजन के अनुसार आरोपित ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर भारतीय सेना में नौकरी दिलाने का झांसा देकर सूचक एवं उसके साथियों से लगभग 45 लाख रुपये की ठगी की। आरोप है कि अभियुक्त ने खुद को सेना अधिकारी बताकर पीड़ितों को दिल्ली और लेह तक ले गया और ज्वाइनिंग कराने का भरोसा दिया, लेकिन बाद में फरार हो गया।

    अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि आरोपित एवं उसके साथियों ने कथित तौर पर फर्जी ज्वाइनिंग लेटर, फर्जी डाक्टर मुहर, कैंटीन कार्ड, आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार किए थे।

    जांच के दौरान ये दस्तावेज आरोपित के किराए के मकान से बरामद किए गए। केस डायरी में दर्ज बैंक स्टेटमेंट से भी आरोपितों के खातों में रकम ट्रांसफर होने की पुष्टि होने का दावा किया गया।

    फायरिंग मामले में नौ आरोपित बरी

    अपर न्यायायुक्त संजीव झा की अदालत ने छह साल पुरानी हत्या की कोशिश, फायरिंग और आर्म्स एक्ट मामले में ट्रायल फेस कर रहे नौ आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि कांके थाना में दर्ज कांड में अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा।

    बरी होने वालों में मोसाहिद अंसारी, तौहिद अंसारी, नेजाम अंसारी, आबिद अंसारी, अकबर अंसारी, इस्माइल अंसारी, असगर अंसारी, यूसुफ अंसारी और मोजाहिद अंसारी शामिल है।

    अभियोजन के अनुसार 26 अगस्त 2020 को जमीन विवाद के दौरान आरोपितों ने हथियारों से लैस होकर सूचक मोलिब अंसारी और उनके परिजनों पर हमला किया था तथा फायरिंग की थी।

    सुनवाई के दौरान सूचक सहित तीन प्रमुख गवाह अपने बयान से मुकर गए और अदालत में केवल धक्का-मुक्की होने की बात कही। जांच अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने स्वयं जांच नहीं की थी। अदालत ने पाया कि किसी भी गवाह ने फायरिंग, जानलेवा हमला या अवैध हथियार रखने के आरोप की पुष्टि नहीं की।

    वकील महेश तिवारी की अपील पर सुनवाई जारी

    न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 की अदालत में शनिवार को सजायाफ्ता हाई कोर्ट के अधिवक्ता महेश तिवारी की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से बहस की गई, जो पूरी नहीं हो सकी।

    मामले में अगली सुनवाई 23 मई को निर्धारित की गई है। महेश तिवारी को निचली अदालत ने पिछले दिनों एक मामले में दो साल की सजा सुनाई थी। जिसकी चुनौती देते हुए उन्होंने 22 अप्रैल को अपील दाखिल की है।

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