झारखंड में इको टूरिज्म से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण के साथ युवाओं को मिलेगा रोजगार
झारखंड प्राकृतिक सौंदर्य और संसाधनों से भरपूर है, जहां इको-टूरिज्म के जरिए अर्थव्यवस्था को गति देने की पहल की जा रही है। ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
जोन्हा, दुमका, दलमा में इको-टूरिज्म से अर्थव्यवस्था को गति।
स्थानीय समुदाय को स्वरोजगार, युवाओं को आजीविका के नए रास्ते।
पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएँ, प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा प्राथमिकता।
राज्य ब्यूरो, रांची। प्राकृतिक सौंदर्य और संसाधनों से भरपूर झारखंड में इको टूरिज्म के जरिए अर्थव्यवस्था को गति देने की पहल की जा रही है।
वन एवं पर्यावरण विभाग ने रांची जिले के जोन्हा में इको टूरिज्म की पहल की है। हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जोन्हा का दौरा किया था और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर अपलोड किया था।
अभी दुमका जिले में मयूराक्षी नदी के किनारे इको टूरिज्म चलाया जा रहा है। यहां इको फ्रेंडली कॉटेज में रहकर पर्यटक मयूराक्षी नदी पर बने बांध और वहां के वन क्षेत्र को देखते हैं।
इसके अलावा दलमा में भी इको टूरिज्म कराया जा रहा है। लातेहार जिले के लोध और चतरा के तमाशीन जलप्रपात क्षेत्र में भी इको टूरिज्म चलाने की योजना बनाई जा रही है।
इसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दी जाएगी। युवाओं को स्वरोजगार के जरिए आजीविका के नए रास्ते बताए जाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटकों को मिलेंगी सुविधाएं
राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने जोन्हा में इको टूरिज्म की संभावना देखते हुए पर्यावरण की सुरक्षा के साथ कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है।
स्थानीय वन प्रबंधन समिति को इस तरह के इको टूरिज्म स्थलों के प्रबंधन से जोड़ा जाएगा। उन्होंने पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधा देते हुए प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात भी कही है।
क्या होता है इको टूरिज्म
इको टूरिज्म में स्थानीय समुदाय की पारंपरिक मान्यताओं के प्रति प्रतिबद्धता रखते हुए बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाती है। संरक्षित क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय समुदाय के लिए पर्यावरण संरक्षण और स्थायी आजीविका का संतुलन बनाकर ही इको टूरिज्म किया जाता है।
इसमें स्थानीय हस्तशिल्प, कारीगरी और खाद्य सामग्री को पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है। इससे जहां पर्यटक स्थल का विकास होता है। वहीं, स्थानीय समुदाय को स्वरोजगार मिलता है।
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