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    झारखंड फैकल्टी डेवलपमेंट एकेडमी: अगले सत्र से शुरू होगी शिक्षकों की ट्रेनिंग, प्रमोशन से भरे जा रहे जरूरी पद  

    Updated: Tue, 10 Feb 2026 03:16 PM (IST)

    झारखंड स्टेट फैकल्टी डवलपमेंट एकेडमी को सक्रिय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। उच्च शिक्षा परिषद को इसकी जिम्मेदारी मिली है। अस्थायी व्यवस्था के तहत स ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. एकेडमी को क्रियाशील करने की कवायद तेज।

    2. अगले शैक्षणिक सत्र से प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे शुरू।

    3. शिक्षकों, कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना मुख्य उद्देश्य।

    राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में गठित झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट एकेडमी को क्रियाशील करने की कवायद तेजी हो गई है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत झारखंड राज्य उच्च शिक्षा परिषद को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। 

    इस संस्थान को क्रियाशील बनाने के लिए अस्थायी व्यवस्था के तहत सभी आवश्यक पद प्रोन्नति से भरे जा रहे हैं। इनमें संयुक्त निदेशक, महाप्रबंधक, सेंटर को-आर्डिनेटर, प्रशासी पदाधिकारी जैसे पद सम्मिलित हैं। इन पदों पर विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों, सह प्राध्यापकों, सहायक प्राध्यापकों की प्रतिनियुक्ति तीन वर्ष के लिए की जा रही है।

    विभाग की कोशिश अगले शैक्षणिक सत्र से यहां प्रशिक्षण शुरू करने की है। इनमें इंडक्शन प्रोग्राम, रिफ्रेशर कोर्स, फैकल्टी डवलपमेंट एवं क्षमता विकास से संबंधित अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्मिलित हैं।

    इस एकेडमी का गठन महाराष्ट्र में कार्यरत स्टेट फैकल्टी डवलपमेंट एकेडमी की तर्ज पर किया गया है। कंपनी एक्ट के तहत इसका गठन हुआ है।

    शिक्षकों की होगी ट्रेनिंग 

    फिलहाल इसका अस्थायी कार्यालय रांची के नामकोम स्थित झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय कैंपस में किया गया है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों, अंगीभूत कालेजों, इंजीनियरिंग कालेजों, पालीटेक्निक संस्थानों आदि के शिक्षकों, कर्मचारियों और पदाधिकारियों के प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी क्षमता का निर्माण करना है।

    इस एकेडमी के गठन के साथ ही सेंटर को-आर्डिनेटर के कई पदों पर प्रतिनियुक्ति हो चुकी है। इस एकेडमी के लिए राज्य एवं राज्य के बाहर स्थित कई संस्थानों को नालेज पार्टनर बनाया गया है।

    एकेडमी का गठन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत किया गया है। बताते चलें कि अभी तक शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों एवं अन्य कर्मियों के प्रशिक्षण के लिए अलग से कोई विशेषज्ञ संस्थान नहीं था। यह संस्थान दूसरे राज्यों के शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों व कर्मियों को भी प्रशिक्षण दे सकेगा।

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