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    JPSC: वन क्षेत्र पदाधिकारी और सहायक वन संरक्षक भर्ती परीक्षा पर भी लटकी रद होने की तलवार

    Updated: Thu, 13 Aug 2026 01:20 PM (IST)

    झारखंड में वन क्षेत्र पदाधिकारी और सहायक वन संरक्षक नियुक्ति परीक्षाएं रद हो सकती हैं, क्योंकि सीआईडी जांच में इनमें भी गड़बड़ियां सामने आई हैं। मुख्य ...और पढ़ें

    सफल अभ्यर्थियों की शारीरिक जांच का तय था कार्यक्रम, किया स्थगित।

    सफल अभ्यर्थियों की शारीरिक जांच का तय था कार्यक्रम, किया स्थगित।

    HighLights

    1. सीआईडी जांच में दोनों परीक्षाओं में गड़बड़ी मिली।

    2. मुख्यमंत्री पहले ही अन्य जेपीएससी परीक्षाएं रद्द कर चुके।

    3. शारीरिक जांच कार्यक्रम अगले आदेश तक स्थगित किया गया।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग की झारखंड वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा के अलावा सहायक वन संरक्षक नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा भी रद हो सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, संयुक्त सिविल सेवा बैकलाग परीक्षा-2023 तथा संयुक्त सिविल सेवा बैकलाग परीक्षा-2025 रद करने की घोषणा कर चुके हैं।

    हालांकि अभी परीक्षाओं के रद होने की सूचना प्रकाशित नहीं हुई है। सीआईडी जांच में झारखंड वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा के अलावा सहायक वन संरक्षक नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा में भी गड़बड़ी सामने आई है। ऐसे में इन दोनों परीक्षाओं के भी रद होने की पूरी संभावना है।

    जेपीएससी की उक्त दोनों की मुख्य परीक्षा आयोजित की जा चुकी है। परिणाम भी जारी हो चुका है। सीआडी जांच से पूर्व आयोग ने दोनों परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों की शारीरिक जांच का कार्यक्रम तय कर दिया था।

    इसके तहत झारखंड वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति के लिए शारीरिक जांच 11-13 अगस्त तक होनेवाली थी, जबकि सहायक वन संरक्षक नियुक्ति के लिए शारीरिक जांच 17-18 अगस्त को प्रस्तावित थी। आयोग ने फिलहाल दोनों की शारीरिक जांच की प्रक्रिया को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया है।

    बताते चलें कि वन क्षेत्र पदाधिकारी के 170 तथा सहायक वन संरक्षक के 78 पदों पर नियुक्ति के लिए यह परीक्षा आयोजित की जा रही है। इनमें सहायक वन संरक्षक नियुक्ति मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र में कई शाब्दिक अशुद्धियां सामने आई थीं।

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    अशुद्धियों का स्तर इतना था कि उतनी अशुद्धियां किसी तीसरी-चौथी कक्षा के बच्चों से भी उम्मीद नहीं की जा सकती। इसके बाद भी आयोग ने मुख्य परीक्षा को रद नहीं किया था। 

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