नौकरी मिलने पर नहीं रोका जा सकता वकीलों का एनरोलमेंट सर्टिफिकेट, झारखंड हाई कोर्ट का आदेश
झारखंड हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय दिया है कि यदि विधि स्नातक ने नामांकन के लिए आवेदन किया और जांच के समय नौकरी में नहीं था, तो नौकरी मिलने के बाद ...और पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट। फाइल फोटो
HighLights
नौकरी मिलने के बाद भी एनरोलमेंट सर्टिफिकेट जारी हो।
जांच के समय बेरोजगार होने पर प्रमाण पत्र न रोकें।
बार काउंसिल तत्काल जारी करे, नौकरी में रहते निलंबित।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि अगर किसी विधि स्नातक ने बार काउंसिल में एनरोलमेंट के लिए आवेदन किया है और स्क्रूटनी की तिथि तक वह किसी नौकरी में नहीं था, तो नौकरी मिलने के बाद उसका एनरोलमेंट सर्टिफिकेट रोका नहीं जा सकता।
अदालत ने कहा कि बार काउंसिल तत्काल प्रार्थी को एनरोलमेंट सर्टिफिकेट जारी करे, जो 15 अक्टूबर 2024 से प्रभावी होगा। लेकिन इसे तीन अक्टूबर 2024 से लेकर जब तक हाई कोर्ट में नियुक्त है, तब तक निलंबित रखा जाएगा।
इस संबंध में प्रार्थी रिचा प्रिया ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर झारखंड राज्य बार काउंसिल के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसका एनरोलमेंट सर्टिफिकेट इसलिए रोक दिया गया, क्योंकि वह हाई कोर्ट में ला रिसर्चर/रिसर्च एसोसिएट के पद पर नियुक्त हो गई थी।
सीनियर एडवोकेट की बेटी का मामला
अदालत ने बार काउंसिल अब हर महीने कम से कम दो बार एनरोलमेंट कमेटी और स्क्रूटनी कमेटी की बैठक करने का भी निर्देश दिया है। रिचा प्रिया हाई कोर्ट के अधिवक्ता भावेश कुमार की पुत्री हैं।
रिचा प्रिया ने 30 अगस्त 2024 को बार काउंसिल में एडवोकेट के रूप में एनरोलमेंट के लिए आवेदन किया था। 11 सितंबर 2024 को उनके आवेदन की स्क्रूटनी हुई।
इसके 14 दिन बाद यानी 26 सितंबर 2024 को उन्हें एनरोलमेंट सर्टिफिकेट मिल जाना चाहिए था, लेकिन 27 सितंबर 2024 को उन्हें हाई कोर्ट में ला रिसर्चर/रिसर्च एसोसिएट के पद पर नियुक्ति पत्र मिला और तीन अक्टूबर 2024 को उन्होंने ज्वाइन किया।
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बार काउंसिल ने 15 अक्टूबर 2024 को अन्य सभी आवेदकों को एनरोलमेंट सर्टिफिकेट तो जारी कर दिए, लेकिन रिचा प्रिया को यह कहते हुए नहीं दिया कि वह अब हाई कोर्ट में नियुक्त हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि 30 अगस्त 2024 (आवेदन की तारीख) और 11 सितंबर 2024 (स्क्रूटनी की तारीख) को प्रार्थी हाई कोर्ट में नियुक्त नहीं थी। ऐसे में बार काउंसिल को 26 सितंबर 2024 को ही एनरोलमेंट सर्टिफिकेट जारी कर देना चाहिए था।
अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि प्रार्थी तीन अक्टूबर 2024 से हाई कोर्ट में नियुक्त हो गई थी, इसलिए वह बार काउंसिल को सूचित करने और अपना लाइसेंस निलंबित कराने के लिए बाध्य थी।
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