पेंशन भुगतान में लापरवाही पर हाई कोर्ट सख्त, तीन अधिकारियों का वेतन रोका; प्रधान सचिव को नोटिस
झारखंड हाई कोर्ट ने पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के खिलाफ पेंशन बकाया भुगतान न करने पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता औ ...और पढ़ें

झारखंड हाई कोर्ट ने पेंशन भुगतान न करने पर अधिकारियों के वेतन पर लगाई रोक।
HighLights
पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के वेतन पर रोक।
पेंशन बकाया भुगतान न करने पर अदालत का आदेश।
प्रधान सचिव को भी अवमानना नोटिस जारी किया गया।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में पेंशन बकाया राशि का भुगतान नहीं किए जाने के खिलाफ दाखिल अवमानना मामले सोमवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद अदालत ने पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार, मुख्य अभियंता मनोहर कुमार, अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार श्रीवास्तव और कार्यपालक अभियंता विनोद कच्छप को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
इन सभी अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 12 जून को निर्धारित की गई है। अदालत ने मुख्य अभियंता मनोहर कुमार, अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार श्रीवास्तव तथा कार्यपालक अभियंता विनोद कच्छप का वेतन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
कोर्ट ने कहा है कि यदि अगली तिथि तक आदेश का पालन नहीं हुआ, तो प्रधान सचिव का वेतन भी रोक दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 12 जून को होगी। इस संबंध में रंजीत बिहारी प्रसाद ने अवमानना याचिका दाखिल की है।
अदालत ने अपने पूर्व आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया था कि प्रार्थी को उनके अंतिम वेतन (ग्रेड पे 4200) के आधार पर पेंशन एवं अन्य पेंशनरी लाभ निर्धारित कर भुगतान किया जाए।
सोमनाथ ओझा को भी अंतिम वेतन 23 हजार रुपये के आधार पर पेंशन और छठे वेतन आयोग के अनुसार बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। इस पूरी प्रक्रिया को आठ सप्ताह के भीतर पूरा करने का आदेश दिया गया था।
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अदालत ने पाया कि निर्धारित समय सीमा में आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके बाद प्रार्थी ने सात मई 2024 को अवमानना याचिका दायर की। 14 जनवरी 2025 को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से चार सप्ताह का समय मांगा गया, लेकिन इसके बावजूद आदेश का अनुपालन नहीं किया गया।
राज्य सरकार ने बाद में 25 जून 2025 को एकलपीठ के आदेश के खिलाफ खंडपीठ में अपील दाखिल की, जो प्रारंभ में त्रुटिपूर्ण थी और कई अवसर दिए जाने के बावजूद समय पर त्रुटियां दूर नहीं की गईं।
इसके बाद भी राज्य की ओर से सुनवाई के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इसरार अहमद खान बनाम अमरनाथ प्रसाद के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि आदेशों के अनुपालन में देरी और बाद में विलंबित अपील दाखिल कर अवमानना से बचने की कोशिश न्यायिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
ऐसे मामलों में सख्ती से निपटने की जरूरत है। अदालत ने इस आदेश की प्रति महालेखाकार, मुख्य सचिव, वित्त सचिव तथा राज्य के संबंधित विभागों को भेजने का निर्देश दिया है ताकि आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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