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    रांची विवि के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी में नए दाखिलों पर रोक, हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

    Updated: Sat, 21 Mar 2026 12:53 PM (IST)

    रांची हाई कोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी (ILS) में नए शैक्षणिक सत्र के लिए छात्रों के नामांकन पर रोक लगा दी है। यह फैसला बा ...और पढ़ें

    हाई कोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय से लीगल स्टडीज पर मांगा जवाब।

    हाई कोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय से लीगल स्टडीज पर मांगा जवाब।

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने ILS में नए छात्रों के नामांकन पर रोक लगाई।

    2. बार काउंसिल के मानकों का पालन न करने पर हुई यह कार्रवाई।

    3. रांची विश्वविद्यालय को व्यवस्थाएं सुधारने का निर्देश दिया गया।

    राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत में रांची विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट आफ लीगल स्टडी (आइएलएस) की मान्यता से जुड़े मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने नए शैक्षणिक सत्र में छात्रों के नामांकन पर रोक लगा दी है।

    अदालत ने रांची विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि कालेज की सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई एक अप्रैल को निर्धारित की गई है। इस संबंध में प्रार्थी अंबेश कुमार चौबे एवं अन्य की ओर से याचिका दाखिल की गई है।

    प्रार्थी के अधिवक्ता अनूप अग्रवाल ने अदालत को बताया कि बार काउंसिल आफ इंडिया की ओर से बार-बार कालेज को आवश्यक मानकों के अनुरूप संरचना सुधारने के निर्देश दिए गए, लेकिन अब तक उनका पालन नहीं किया गया।

    छात्रों के भविष्य पर संकट

    इस पर बार काउंसिल ने अंतिम चेतावनी जारी करते हुए छह महीने के भीतर सभी कमियों को दूर करने को कहा है, अन्यथा कालेज की मान्यता निरस्त की जा सकती है। इससे यहां पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।

    अधिवक्ता ने अदालत को यह भी बताया कि यदि मान्यता समाप्त होती है, तो कालेज से पासआउट छात्रों के डिग्री प्रमाणपत्र की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

    उन्होंने कालेज की कई खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि प्रिंसिपल के पद पर समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर कार्यरत हैं, जबकि नियमों के अनुसार इस पद पर विधि (ला) विषय में स्नातकोत्तर योग्यताधारी प्रोफेसर होना चाहिए।

    अंशकालिक शिक्षकों के सहारे पढ़ाई

    इसके अलावा कालेज में आवश्यक संख्या में स्थायी शिक्षकों की भी कमी है। नियम के अनुसार कम से कम 10 स्थायी प्रोफेसर होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में अंशकालिक शिक्षकों के सहारे पढ़ाई कराई जा रही है।

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    लाइब्रेरी, खेल मैदान सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बताया गया। कालेज प्रबंधन की ओर से अदालत को बताया गया कि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय को पत्र लिखा गया था, लेकिन विश्वविद्यालय ने फिलहाल पद स्वीकृत करने में असमर्थता जताई और कालेज को स्वयं व्यवस्था करने को कहा।

    यह एक स्व पोषित कालेज है, जहां प्रतिवर्ष लगभग दो करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि छात्रों से प्राप्त शुल्क के माध्यम से करीब तीन करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।

    प्रबंधन ने यह भी कहा कि छोटानागपुर ला कॉलेज के साथ एमओयू के तहत छात्रों को पठन-पाठन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कालेज में फिलहाल 418 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।

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