पूर्व डीजीपी का आदेश नियम विरुद्ध, धनबाद के 54 पुलिसकर्मी होंगे वापस; झारखंड हाई कोर्ट से प्रशासनिक स्थानांतरण रद
झारखंड हाई कोर्ट ने पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में धनबाद से हटाए गए 54 पुलिसकर्मियों की वापसी का आदेश दिया है। कोर्ट ने प्रशासनिक दृष्टिको ...और पढ़ें

झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिसकर्मियों के पक्ष में सुनाया फैसला, डीजीपी को दिया वापसी कराने का निर्देश।
HighLights
हाई कोर्ट ने 54 धनबाद पुलिसकर्मियों की वापसी का आदेश दिया।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से हुए स्थानांतरण को कोर्ट ने रद किया।
पुलिस एसोसिएशन ने फैसले को ऐतिहासिक बताया, दिशानिर्देश की मांग।
दिलीप कुमार, रांची। झारखंड पुलिस के तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में प्रशासनिक दृष्टिकोण से धनबाद से हटाए गए 54 पुलिसकर्मी वापस होंगे। हटाए गए पुलिसकर्मियों की याचिका डब्ल्यूपी (एस) नंबर 1781/2025 में 16 अप्रैल 2026 को झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने तत्कालीन स्थानांतरण आदेश को रद करते हुए उक्त आदेश दिया है।
कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिया है कि उक्त के आलोक में तत्काल कार्रवाई करें। पुलिसकर्मियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है।
उनका कहना है कि बिना किसी आरोप के प्रशासनिक दृष्टिकोण से पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण गलत है।
सामान्य स्थानांतरण व प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण में अंतर होता है। सामान्य स्थानांतरण में जिस जिले से स्थानांतरित हुए, उसी जिले में वापसी संभव है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण मतलब अनुशासनहीनता के आरोप में स्थानांतरण।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण के लिए पुलिस मैनुअल में नियम है कि इसे किसी भी परिस्थिति में निरस्त नहीं किया जा सकता है। जिस पर यह लगता है, उसे दूसरे जिले में ही स्थानांतरित किया जा सकता है। इस स्थिति में उनकी उसी जिले में पुन: वापसी नहीं हो सकती है।
24 फरवरी 2025 को हटाने व 11 मार्च 2025 को स्थानांतरण हुआ था आदेश
जिन 54 पुलिसकर्मियों को प्रशासनिक दृष्टिकोण से हटाया गया था, उन्हें हटाने संबंधित आदेश 24 फरवरी 2025 को हुआ था। वहीं, 11 मार्च 2025 को उन्हें स्थानांतरित करने संबंधित चिट्ठी जारी हुई थी। प्रशासनिक दृष्टिकोण से स्थानांतरण किए जाने के विरोध में ही इन पुलिसकर्मियों ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
जागरण ने भी नौ व दस मई 2025 को प्रमुखता से उठाया था अनियमितता का मुद्दा
दैनिक जागरण ने भी नौ व दस मई 2025 को अवैध तरीके से स्थानांतरण-पदस्थापन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। अपनी रिपोर्ट में जागरण ने बताया था कि डीजीपी के गोपनीय शाखा में बैठे कुछ लोग नियम विरुद्ध ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में लगे हुए हैं।
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तब तत्कालीन एसएसपी धनबाद की अनुशंसा पर कोयला क्षेत्र बोकारो के तत्कालीन डीआइजी सुरेंद्र कुमार झा ने 28 जनवरी को 54 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण प्रशासनिक दृष्टिकोण से करने की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय से की थी।
डीजीपी के आदेश पर सभी 54 पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण हो भी गया था। डीजीपी के आदेश पर डीआइजी कार्मिक ने 24 फरवरी को प्रशासनिक दृष्टिकोण लगाते हुए सभी 54 पुलिसकर्मियों का विभिन्न जिला-इकाइयों में स्थानांतरण-पदस्थापन कर दिया था।
इसके बाद एसडीपीओ बाघमारा की पांच मई को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर पर डीजीपी ने उन 54 पुलिसकर्मियों में से दो सिपाही संजय कुमार महतो व गौरव कुमार सिंह के स्थानांतरण को रद करते हुए पुन: धनबाद जिले में वापस कर दिया था। यह प्रशासनिक दृष्टिकोण से हटाने संबंधित पुलिस मैनुअल के विरुद्ध आदेश था। जिसका अन्य पुलिसकर्मियों ने विरोध किया था।
स्थानांतरण की प्रक्रिया में व्यापक अनियमितता: एसोसिएशन
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत से दिए गए निर्णय को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा है कि यह निर्णय उन 54 पुलिसकर्मियों के पक्ष में है, जिन्हें तत्कालीन धनबाद एसएसपी व तत्कालीन डीजीपी ने नियम विरुद्ध तरीके से प्रशासनिक दृष्टिकोण का हवाला देकर विभिन्न जिलों में स्थानांतरित कर दिया था।
यह जीत उन कर्मियों के धैर्य की भी है। सभी मंचों पर संबंधित आग्रह के बावजूद कहीं सुनवाई नहीं हुई तो निराश होकर उक्त पुलिसकर्मियों ने स्थानांतरित जिला बल में योगदान दिया था। न्यायालय ने उनकी बातों को सुना और माना कि उक्त कर्मियों के साथ नियम संगत करवाई की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
पुलिस मुख्यालय से 24 फरवरी 2025 को निर्गत आदेश को निरस्त करते हुए न्यायालय ने सभी पुलिसकर्मियों को पुनः धनबाद जिला बल में योगदान कराने के लिए पुलिस मुख्यालय झारखंड को आदेशित किया है।
झारखंड पुलिस एसोसिएशन की ओर से भी निरंतर यह मुद्दा उठाया जाता रहा है कि ''प्रशासनिक दृष्टिकोण'' के नाम पर स्थानांतरण की प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताएं बरती जा रही हैं।
पुलिस हस्तक नियम (पुलिस मैनुअल) के प्रविधानों की अनदेखी कर, पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों के पुलिस अधीक्षक तक बिना किसी ठोस आधार के पदाधिकारियों की पसंद-नापसंद के आधार पर स्थानांतरण की अनुशंसा कर देते हैं।
सदस्यों को इसका खामियाजा परिवार के साथ-साथ उनके मनोबल पर भी पड़ता है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने डीजीपी से मांग की है कि सभी जिलों के सक्षम पदाधिकारियों के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शिका जारी की जाए, ताकि भविष्य में बिना भेदभाव के ''प्रशासनिक दृष्टिकोण'' के तहत होने वाले स्थानांतरणों में ''पुलिस हस्तक नियम'' का कड़ाई से पालन हो सके।