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    हजारीबाग नाबालिग दुष्कर्म हत्या मामले में हाईकोर्ट ने DGP से मांगा जवाब, जांच में देरी पर जताई नाराजगी

    Updated: Mon, 30 Mar 2026 06:44 PM (IST)

    झारखंड हाई कोर्ट ने हजारीबाग में नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या मामले में अखबारों की खबर पर स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने गृह सचिव, डीजीपी और हजारीबाग ...और पढ़ें

    झारखंड उच्च न्यायालय। (जागरण)

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    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने हजारीबाग में एक नाबालिग से दुष्कर्म और उसके बाद हत्या किए जाने के मामले में अखबारों में छपी खबर पर सोमवार को संज्ञान लिया है।

    अदालत ने इस मामले में राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और हजारीबाग एसपी को नोटिस जारी करते हुए सभी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

    अदालत ने पीड़ित परिवार को पर्याप्त सुरक्षा देने का भी निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने यह मामला आगे की सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस के पास स्थानांतरित कर दिया है।

    सोमवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता हेमंत सिकरवार ने अदालत के समक्ष मामला उठाते हुए घटना की पूरी जानकारी दी और इसकी निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया।

    अधिवक्ता हेमंत सिकरवार ने अदालत के समक्ष अखबारों की प्रति प्रस्तुत करते हुए बताया कि यदि यह खबर प्रकाशित नहीं होती, तो मामला अदालत के संज्ञान में नहीं आ पाता।

    खबर को देखने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए तत्काल सुनवाई की। अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्य के डीजीपी और हजारीबाग के एसपी को दूरभाष के माध्यम से जोड़ने का निर्देश दिया।

    दोनों अधिकारी मोबाइल के जरिए सुनवाई में शामिल हुए। अदालत ने हजारीबाग एसपी से पूछा कि घटना 24 मार्च की है, 25 मार्च को केस दर्ज हुआ, लेकिन अभी तक छह दिन बीत जाने के बाद आरोपित की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी।

    एसपी ने कहा- रामनवमी के कारण कार्रवाई प्रभावित

    सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से बताया गया कि गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है, लेकिन रामनवमी के कारण कार्रवाई प्रभावित हुई। अदालत ने इस जवाब पर असंतोष जताया और पूछा कि बच्ची के कपड़ों को अबतक फोरेंसिक जांच के लिए क्यों नहीं भेजा गया।

    इस पर पुलिस कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी और कोर्ट से अब तक अनुमति नहीं लेने की बात कही। अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जांच करना पुलिस का दायित्व है, इसके लिए कोर्ट से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

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    राजनीतिक दबाव जांच में बाधा तो नहीं?

    अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव जांच में बाधा बन रही है? पुलिस ने इससे इंकार किया। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता हेमंत सिकरवार ने पीड़िता के स्वजनों और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

    उन्होंने आशंका जताई कि उन्हें धमकाया जा सकता है या प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। फारेंसिक जांच में देरी पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इससे साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की आशंका बढ़ सकती है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने हजारीबाग एसपी को स्पष्ट निर्देश दिया कि पीड़िता के स्वजनों और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

    कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि उनके साथ कोई भी अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी और अदालत कड़ी कार्रवाई करेगी।

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