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तब झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC CGL की नियुक्ति को ठहराया था सही, एक साल चली थी सुनवाई

Updated: Fri, 14 Aug 2026 11:00 AM (IST)

JPSC में गड़बड़ी के विरोध के बीच JSSC CGL नियुक्ति में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया जा रहा है। झारखंड हाई कोर्ट ने लगभग एक साल की सुनवाई के बाद JSSC CGL नियुक्ति को सही ठहराया था और SIT जांच जारी रखने का आदेश दिया था।

कोर्ट के आदेश के बाद ही चयनित अभ्यर्थियों की हुई थी नियुक्ति।

कोर्ट के आदेश के बाद ही चयनित अभ्यर्थियों की हुई थी नियुक्ति।

HighLights

  1. JSSC CGL नियुक्ति को झारखंड हाई कोर्ट ने सही ठहराया।

  2. कोर्ट ने अनियमितताओं की SIT जांच जारी रखने का आदेश दिया।

  3. सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए सरकार को निर्देश दिए गए।

राज्य ब्यूरो, रांची। जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा नियुक्ति में गड़बड़ी को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन अब जेएसएससी सीजीएल परीक्षा नियुक्ति में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया जा रहा है। जबकि इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट में लगभग एक साल तक सुनवाई चली। सीजीएल रद करना आंदोलन जारी रहने का आज सबसे बड़ा मुद्दा बना गया है।

तीन दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में एसआइटी जांच को जारी रखने का निर्णय लेते हुए प्रार्थियों की तीनों मांगों को ठुकरा दिया था। प्रार्थियों ने इस मामले की सीबीआई जांच, कोर्ट की निगरानी में जांच और सीजीएल के परिणाम पर रोक लगाने की मांग की थी।

तब कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस मामले में एसआईटी की जांच उचित है, क्योंकि प्रार्थियों की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका कि मामले में एसआईटी सही जांच नहीं कर रही है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि एसआइटी की ओर से छह माह में जांच पूरी की जाए। उसके बाद हाई कोर्ट ने पूर्व में जेएसएससी सीजीएल के परिणाम पर लगी रोक को हटाते हुए सरकार को निर्देश दिया था कि सफल अभ्यर्थियों को उनके पद पर नियुक्त की जाए।

कोर्ट के बाद सीजीएल में चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी कर दी गई है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि गलत प्रक्रिया शामिल दस अभ्यर्थियों के अलावा अगर जांच में अन्य का नाम आता है, तो सरकार उनके खिलाफ भी कार्रवाई करें।

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