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    477 दिन की देरी से अपील दायर करने पर भड़का झारखंड हाई कोर्ट, राज्य सरकार की याचिका खारिज

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 05:30 AM (GMT+05:30)

    झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की 477 दिन की देरी से दायर अपील को खारिज कर दिया है। ...और पढ़ें

    झारखंड हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)

    झारखंड हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज की।

    2. अपील 477 दिन की भारी देरी से दाखिल हुई।

    3. सरकार देरी का ठोस कारण नहीं बता पाई।

    राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने 477 दिन की देरी से राज्य सरकार की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए देरी माफ करने से इनकार कर दिया।

    अदालत ने कहा कि सरकार देरी के लिए पर्याप्त कारण बताने में विफल रही है। इसलिए अपील खारिज की जाती है। मामला जय प्रकाश चौधरी से संबंधित है।

    राज्य सरकार ने हाई कोर्ट की एकलपीठ के 13 फरवरी 2024 को पारित आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। अपील निर्धारित समय सीमा से 477 दिन की देरी से दाखिल की गई।

    देरी माफ करने के लिए सरकार की ओर से दायर आवेदन में बताया गया कि एकलपीठ के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने, अभ्यावेदन पर सुनवाई करने, कानूनी राय लेने, संबंधित अभिलेख जुटाने और फाइल को विभिन्न स्तरों से गुजरने में समय लगा। इसी कारण निर्धारित समय में अपील दाखिल नहीं हो सकी।

    कोर्ट ने पूछा- हर चरण में इतना समय क्यों लगा

    खंडपीठ सरकार की इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि आवेदन में केवल विभागीय प्रक्रिया का विवरण दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि प्रत्येक चरण में इतना अधिक समय क्यों लगा।

    कोर्ट ने पाया कि एकलपीठ का आदेश 13 फरवरी 2024 को पारित हुआ था, लेकिन उसकी प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन करीब दो महीने बाद किया गया।

    इसके बाद संबंधित अभ्यावेदन पर सुनवाई पूरी होने के बाद अंतिम निर्णय लेने और उसकी सूचना देने में करीब छह महीने लगा। जबकि एकलपीठ ने छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

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