40 साल से प्रधानी कर रहे सुल्तान मियां को झारखंड हाई कोर्ट ने दी राहत, आयुक्त का आदेश निरस्त
झारखंड हाई कोर्ट ने जामताड़ा के केंदुआ मौजा के प्रधान पद विवाद में सुल्तान मियां को राहत दी है। ...और पढ़ें
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झारखंड हाई कोर्ट।
HighLights
झारखंड हाई कोर्ट ने सुल्तान मियां को प्रधान पद पर राहत दी।
आयुक्त का 2018 का आदेश निरस्त, 1982 की नियुक्ति बहाल।
अदालत ने कहा आयुक्त ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश दिया।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने जामताड़ा के नारायणपुर प्रखंड स्थित केंदुआ मौजा के प्रधान पद को लेकर चल रहे विवाद में सुल्तान मियां को राहत दी है।
अदालत ने शुक्रवार को संताल परगना प्रमंडल के आयुक्त का छह जून 2018 का आदेश निरस्त कर दिया। अदालत ने 1982 में सुल्तान मियां की प्रधान पद पर नियुक्ति को बहाल करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी और उपायुक्त के पुराने आदेशों को भी प्रभावी कर दिया।
सुल्तान मियां के पिता स्वर्गीय कादिर मियां केंदुआ मौजा के प्रधान थे। उनके निधन के बाद सुल्तान मियां ने प्रधान पद के लिए आवेदन किया था।
अनुमंडल पदाधिकारी ने जांच के बाद 29 सितंबर 1982 को उन्हें प्रधान नियुक्त किया। इसके खिलाफ कादिर मियां के पोते इस्लाम मियां ने राजस्व अपील की, लेकिन उपायुक्त ने 19 अक्टूबर 1985 को सुल्तान मियां की नियुक्ति को सही ठहराया।
बाद में इस्लाम मियां ने आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। आयुक्त ने सुल्तान मियां को कादिर मियां का जैविक पुत्र नहीं मानते हुए उनकी नियुक्ति को निरस्त कर दिया था।
इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। अदालत ने कहा कि पुनरीक्षण अधिकारी अपीलीय अदालत की तरह साक्ष्य का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं कर सकता।
दोनों सक्षम अधिकारियों के समान निष्कर्ष के बाद आयुक्त ने तथ्यों का पुनर्मूल्यांकन कर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किया।
अदालत ने यह भी कहा कि सुल्तान मियां के जैविक पुत्र होने का विवादित तथ्य अनुच्छेद 226 के तहत तय नहीं हो सकता। इसके लिए दीवानी अदालत में मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य पेश करने होंगे। इस्लाम मियां को सक्षम दीवानी अदालत जाने की स्वतंत्रता दी गई है।