8 साल तक याचिका लिस्ट नहीं होने पर झारखंड हाई कोर्ट नाराज, कहा- सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं
झारखंड हाई कोर्ट ने 2017 में दाखिल एक आपराधिक याचिका के आठ साल तक सूचीबद्ध न होने पर नाराजगी जताई है। ...और पढ़ें
-1786049891883_m.webp)
झारखंड हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
2017 की याचिका आठ साल तक सूचीबद्ध नहीं हुई।
हाई कोर्ट ने न्यायिक व्यवस्था पर जताई गहरी चिंता।
रजिस्ट्रार जनरल को लंबित मामलों की रिपोर्ट देने का निर्देश।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत ने वर्ष 2017 में दाखिल एक आपराधिक याचिका करीब आठ साल तक सूचीबद्ध नहीं होने पर नाराजगी जताई है।
अदालत ने कहा कि पूरी न्यायिक व्यवस्था वादियों के हित के लिए है। ऐसे में वर्षों तक किसी मामले का सूचीबद्ध नहीं होना उचित नहीं है।
अदालत ने रजिस्ट्रार जनरल को उन मामलों की जानकारी से संबंधित रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है, जो वर्षों से सूचीबद्ध नहीं हुए हैं।
प्रार्थी श्रीकांत राय सहित अन्य ने वर्ष 2017 में याचिका दाखिल की थी। लेकिन अभी तक सूचीबद्ध नहीं हो पाई है। हाई कोर्ट की रजिस्ट्री की ओर से अदालत को बताया गया कि लंबित फाइलों के भौतिक सत्यापन के दौरान गर्मी की छुट्टियों में इस मामले की फाइल मिली।
फाइल क्रिमिनल डिस्पोजल सेक्शन में पड़ी थी। इसे 16 जून 2026 को संबंधित क्रिमिनल मिसलेनियस पिटीशन सेक्शन को भेजा गया, जिसके बाद मामले को पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
कोर्ट ने कहा- केवल माफी मांगना पर्याप्त नहीं
खंडपीठ ने रजिस्ट्री के स्पष्टीकरण पर असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि याचिका वर्ष 2017 में दाखिल हुई थी और गर्मी की छुट्टियों के दौरान भौतिक सत्यापन में इसकी फाइल मिलने की बात रजिस्ट्री की ओर से जरूरी सतर्कता नहीं बरते जाने को दर्शाती है।
अदालत ने सवाल उठाया कि याचिका दाखिल होने के तुरंत बाद इसे लवाजिमा बोर्ड या संबंधित पीठ के समक्ष क्यों सूचीबद्ध नहीं किया गया, इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल माफी मांगना पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं माना जा सकता, क्योंकि करीब आठ साल तक मामला सूचीबद्ध नहीं होने से वादी का मामला गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
वर्षों से लंबित मामलों की मांगी जानकारी
हाई कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि गर्मी की छुट्टियों के दौरान मिली फाइलों में ऐसे कितने मामले हैं, जिन्हें अब तक सूचीबद्ध नहीं किया गया है।
अदालत ने उन मामलों का भी पूरा ब्योरा मांगा है, जो वर्षों से सूचीबद्ध नहीं हुए हैं। अदालत ने कहा कि आगे का आवश्यक आदेश पारित करने से पहले ऐसे मामलों की जानकारी जरूरी है।
यह भी पढ़ें- झारखंड हाई कोर्ट ने नक्शा स्वीकृति मामले में रांची के बिल्डर, जमीन मालिक और टाउन प्लानर को भेजा नोटिस