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    राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्ड पर इलाज से मुकर रहे अस्पताल, झारखंड में 22 दिनों में आए 4 मामले

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 05:30 AM (IST)

    झारखंड में राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार करने के चार मामले 22 दिनों में सामने आए हैं। ...और पढ़ें

    स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी। (फाइल फोटो)

    स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना से अस्पताल कर रहे इनकार।

    2. 22 दिनों में चार पुलिसकर्मियों को नकद इलाज कराना पड़ा।

    3. पुलिस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की।

    दिलीप कुमार, रांची। राज्य के कतिपय अस्पताल राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत इलाज से इनकार कर रहे हैं। पीड़ित परेशान हैं और विवश होकर नकदी भुगतान कर अपना इलाज करा रहे हैं।

    झारखंड पुलिस में महज 22 दिनों के भीतर चार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें अस्पताल प्रबंधन ने सीधे तौर पर कह दिया कि उक्त स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्ड पर इलाज संभव नहीं है।

    अपने पुलिसकर्मियों की शिकायत पर झारखंड पुलिस एसोसिएशन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से मिलकर बीमा कंपनी टाटा एआइजी व संबंधित अस्पताल की शिकायत करेगा और उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई का आग्रह करेगा।

    राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है। इसे लेकर मुख्यमंत्री व विभागीय मंत्री तक गंभीर हैं। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन के इस योजना के प्रति उदासीन रवैये से राज्यकर्मी परेशान हैं। एक पीड़ित ने तो टाटा एआइजी प्रबंधन से भी इसे लेकर लिखित पत्राचार किया है।

    22 दिनों के भीतर चार 4 मामले

    केस नंबर एक : हेल्थ प्वाइंट अस्पताल ने कार्ड से इलाज से किया इनकार

    रेल जिला धनबाद के एएसआइ लाल बाबू पांडेय को रांची के बरियातू स्थित हेल्थ प्वाइंट अस्पताल ने पहले टाटा एआइजी राज्यकर्मी कार्ड से इलाज करने से यह कहते हुए मना किया कि उसपर टाटा एआइजी केवल 62 हजार रुपये से इलाज की अनुमति दे रहा है।

    शेष राशि 60 हजार रुपये नकदी में देना होगा। लाल बाबू पांडेय इसपर भी तैयार हो गए। छह जून को अस्पताल ने उनसे कह दिया कि टाटा एआइजी राज्यकर्मी स्वास्थ्य कार्ड से इलाज नहीं हो पाएगा।

    उन्हें नकदी में एक लाख 51 हजार 900 रुपये देना होगा। उस वक्त लाल बाबू पांडेय के साथ टाटा एआइजी के को-आर्डिनेटर मनोज सिंह भी मौजूद थे।

    मनोज सिंह के बात करने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन कम पैसे का हवाला देकर इलाज करने से मना कर दिया। एएसआइ लाल बाबू पांडेय ने टाटा एआइजी से इसकी लिखित शिकायत की है।

    केस संख्या दो : जगन्नाथ अस्पताल ने कार्ड पर कम राशि का हवाला देकर बेटे के इलाज से मना किया

    धनबाद जिला बल के एसआइ रंजीत उरांव एक्सिडेंट में जख्मी बेटे को इलाज कराने के लिए रांची स्थित जगन्नाथ अस्पताल ले गए थे।

    अस्पताल प्रबंधन ने उनके कैशलेस राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा कार्ड से लाग इन तो कर दिया, लेकिन राशि कम होने का हवाला देकर इलाज से इंकार कर दिया। नतीजा यह हुआ कि रंजीत उरांव ने अपने बेटे का इलाज नकद भुगतान करके करवाया।

    केस संख्या तीन: सड़क दुर्घटना में जख्मी होकर पहुंचे, अस्पताल ने कार्ड से इलाज से किया इनकार

    खबरें और भी

    सिमडेगा जिला बल के सिपाही सुनील राम सड़क दुर्घटना में जख्मी होकर रांची के हेल्थ प्वाइंट अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल ने राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्ड से इलाज से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्हें विवश होकर नकदी भुगतान कर अपना इलाज कराना पड़ा।

    केस संख्या चार: हार्ट अटैक की शिकायत पर पहुंचे, राज अस्पताल ने कार्ड से इलाज से किया मना

    सीआईडी के एएसआई मनोज सिंह हार्ट अटैक की शिकायत पर इलाज कराने के लिए रांची के राज अस्पताल में पहुंचे थे। अस्पताल प्रबंधन ने उनके राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के कार्ड से इलाज से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने नकदी भुगतान कर अपना इलाज कराया।

    क्या है राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना

    राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना राज्य के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों व उनके आश्रितों को कैशलेस और पेपरलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करती है।

    इसके तहत सामान्य बीमारियों में पांच लाख तक व गंभीर बीमारियों में 10 लाख तक मुफ्त इलाज मिलता है। इसके लिए कर्मचारियों के वेतन से प्रतिमाह 500 रुपये प्रीमियम कट जाता है।

    पेंशनभोगियों से छह हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम लिया जाता है। इसके तहत पति, पत्नी, दो बच्चे, माता-पिता व अविवाहित बहन के इलाज का प्रविधान है।

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    हमारे पुलिसकर्मियों-पुलिस पदाधिकारियों को लगातार यह समस्या हो रही है कि उन्हें राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना से इलाज नहीं हो पा रहा है। उन्हें अपने पैसे से इलाज करवाना पड़ रहा है। मैं राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से यह मांग करता हूं कि बीमा कंपनी टाटा एआइजी व संबंधित अस्पतालों के विरुद्ध आवश्यक कदम उठाएं, ताकि हमें स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल सके।

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    राहुल मुर्मू, प्रांतीय अध्यक्ष, झारखंड पुलिस एसोसिएशन।

    कोई भी अस्पताल जो राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना से टैग है, वह फ्री में इलाज से इनकार करते हैं तो मैं वैसे अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई करूंगा। राज्य सरकार राज्य के कर्मियों के स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्ध है। उनके निश्शुल्क इलाज के लिए लगातार प्रयासरत है। ऐसी स्थिति में अस्पताल प्रबंधन इलाज से भाग नहीं सकते हैं।

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    डॉ. इरफान अंसारी, मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग।