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    झारखंड के निलंबित IAS विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, हजारीबाग जमीन घोटाले में मिली राहत; जेल से कब निकलेंगे?

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 07:56 PM (IST)

    आईएएस विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से हजारीबाग जमीन घोटाले में जमानत मिल गई है। कोर्ट ने उन्हें देश न छोड़ने और गवाहों से संपर्क न करने जैसी कड़ी ...और पढ़ें

    झारखंड IAS विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत।

    झारखंड IAS विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत।

    HighLights

    1. सुप्रीम कोर्ट से हजारीबाग जमीन घोटाले में मिली जमानत।

    2. देश न छोड़ने, गवाहों से संपर्क न करने की कड़ी शर्तें।

    राज्य ब्यूराे, रांची। सुप्रीम कोर्ट में हजारीबाग के सेवायत जमीन की खरीद-बिक्री मामले में निलंबित आइएएस अधिकारी विनय चौबे की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुइयां की कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत की सुविधा प्रदान की है।

    अदालत ने विनय चौबे को देश नही छोड़ने और गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्त लगाई और उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने का भी निर्देश दिया है। हालांकि वे अभी जेल से बाहर नहीं निकल पाएंगे, क्योंकि हजारीबाग में ही एक अन्य जमीन घोटाले से संबंधित मामले में उन्हें आरोपित बनाया गया है।

    सुनवाई के दौरान विनय चौबे की ओर से कहा गया कि इस मामले में आरोपित विजय प्रताप सिंह और सुधीर कुमार सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है। ऐसे में उन्हें भी जमानत की सुविधा मिलनी चाहिए।

    उनकी ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित मामला वर्ष 2009- 10 का है, जब वे हजारीबाग के उपायुक्त थे। वह पिछले सात माह से जेल में बंद हैं। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि विनय चौबे अन्य चार मामलों में भी आरोपित हैं।

    बता दें कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ( एसीबी) ने 20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को गिरफ्तार किया था। उनपर आरोप है कि उन्होंने उत्पाद नीति 2022 के तहत मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर काम करने की अनुमति दी, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ।

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    गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ चार और प्राथमिकी दर्ज की गईं। इनमें हजारीबाग में जमीन से जुड़े दो मामले शामिल हैं। एक मामला सेवायत जमीन से संबंधित है, जबकि दूसरा वनभूमि में कथित गड़बड़ी का है। आरोप है कि उपायुक्त रहते हुए उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जमीन अपने करीबी लोगों के नाम कराई।

    इसके अलावा एसीबी में शराब घोटाले से जुड़े मामले में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। पांचवीं प्राथमिकी जगन्नाथपुर थाने में ठगी के आरोप में दर्ज की गई। सभी मामलों की जांच चल रही है।

    कोर्ट की सख्त शर्तें: पासपोर्ट और गवाहों पर नजर

    सुप्रीम कोर्ट ने विनय चौबे को जमानत देते हुए कुछ कड़ी शर्तें लागू की हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि:

    • वे बिना पूर्व अनुमति के देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकते।
    • मामले से जुड़े किसी भी गवाह से संपर्क करने या उन्हें डराने-धमकाने पर उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।
    • जांच एजेंसी जब भी बुलाएगी, उन्हें सहयोग करना होगा।

    flashback: पद का दुरुपयोग और जमीन की हेराफेरी

    विनय कुमार चौबे पर लगे आरोपों की जड़ें उनके हजारीबाग में उपायुक्त (DC) रहने के कार्यकाल से जुड़ी हैं। यह मामला झारखंड के उस बड़े लैंड स्कैम का हिस्सा है जिसने पूरे राज्य की राजनीति को गरमा रखा है।

    1. हजारीबाग जमीन घोटाला

    आरोप है कि हजारीबाग में डीसी पद पर तैनात रहते हुए विनय चौबे ने भू-माफियाओं के साथ साठगांठ की। उन पर प्रतिबंधित श्रेणी की सरकारी जमीनों (गैर-मजरूआ) के अवैध हस्तांतरण, म्यूटेशन और बिक्री में नियमों की अनदेखी करने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों के जरिए कीमती जमीनों को निजी हाथों में सौंपने का खेल उनके कार्यकाल में बड़े पैमाने पर हुआ।

    2. शराब घोटाले का साया

    जमीन के अलावा विनय चौबे झारखंड के बहुचर्चित 'शराब घोटाले' में भी मुख्य अभियुक्तों में से एक हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने उत्पाद विभाग के सचिव रहते हुए छत्तीसगढ़ की तर्ज पर झारखंड में शराब की नई नीति लागू कराई, जिससे सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान हुआ और चुनिंदा सिंडिकेट को फायदा पहुँचाया गया। इसी मामले की वजह से उनकी रिहाई अटकी हुई है।

    3. रसूख से जेल तक का सफर

    झारखंड कैडर के 1999 बैच के आईएएस अधिकारी विनय चौबे सत्ता के बेहद करीब माने जाते थे। वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों और प्रवर्तन निदेशालय (ED) व एसीबी की कार्रवाई ने उनकी चमक कम कर दी और आखिरकार उन्हें जेल जाना पड़ा।

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