JPSC प्रोटेस्ट का 15वां दिन: सरकार की छात्र संगठनों से बैक-टू-बैक बातचीत, NSUI ने सौंपी 5 मांगों की लिस्ट
झारखंड में JPSC और JSSC गड़बड़ी को लेकर छात्रों का आंदोलन 15वें दिन भी जारी है, जिस पर सरकार छात्र संगठनों से बातचीत कर रही है। NSUI ने सरकार को 5 सूत ...और पढ़ें
HighLights
छात्रों का JPSC-JSSC गड़बड़ी पर 15वें दिन भी आंदोलन जारी।
सरकार ने NSUI सहित छात्र प्रतिनिधियों से की बातचीत।
NSUI ने 14वीं JPSC रद्द करने और जांच की मांग की।
जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड में JPSC और JSSC में गड़बड़ी को लेकर छात्रों का आंदोलन 15वें दिन लगातार जारी है। इस बीच सरकार भाजपा और आजसू के छात्र संगठनों को छोड़कर सभी छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों से लगातार बातचीत कर रही है।
इसी कड़ी में आज (8 अगस्त 2026) को सरकार की कमेटी ने सबसे पहले नरेंद्र महतो गुट के प्रतिनिधियों से बात की। इसके बाद NSUI के प्रतिनिधि भी कमेटी से मिले, जिसमें उन्होंने परीक्षा रद करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही संदिग्ध परीक्षाओं की 90 दिनों के अंदर जांच की मांग भी रखी गई।
सभी प्रतिनिधियों से बात कर मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे मांगें
उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि आज छात्र आंदोलन के सभी हितधारकों से मिलकर उनकी भावनाओं को समझना चाहते थे। इसी संबंध में NSUI का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों, अपने सुझावों को लेकर उनसे मिला।
सुदिव्य कुमार ने कहा कि हम लोगों ने भी उनके सुझावों का बड़ी गंभीरता से अध्ययन किया। इस प्रतिनिधिमंडल की मांगें बहुत जायज प्रतीत होती हैं। हम लोग भी ये समझते हैं कि मुख्यमंत्री के सामने जब ये मांगें रखी जाएंगी तो इस संबंध में मुख्यमंत्री का बहुत सकारात्मक जवाब आएगा।
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कांग्रेस ने उठाई 5 मांगें
रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा ने कहा, "सरकार को इस पहल के लिए धन्यवाद। जितने भी हितधारक थे, जिन लोगों की भागीदारी इस आंदोलन में थी, उन सभी से सरकार मुलाकात कर रही है।
NSUI ने अपने पूरा मांग पत्र सौंपा है, जिसे छात्रों से बात करके, उनकी भावनाओं को ध्यान में रख कर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि तत्काल प्रभाव से 14वीं JPSC को रद किया जाए। जितनी भी संदिग्ध परीक्षाएं हुई हैं, CID-SIT के माध्यम से 90 दिनों के अंदर जांच की जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा कि परीक्षाओं को पारदर्शी बनाया जाए। हमारी एक मांग ये भी है कि परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर हो। इसके अलावा एक सुझाव दिया गया है कि सरकार परीक्षा कराने की जिम्मेदारी एजेंसियों को देने की बजाय, खुद से पूरा प्रक्रिया को करे।