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मंगल मुद्दा: सीजीएल में आगे क्या? 1932 नियुक्तियां रद होंगी, 7 लाख अभ्यर्थी प्रभावित; झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं पर संकट!

Updated: Tue, 18 Aug 2026 10:27 AM (GMT+05:30)

झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल की 1932 नियुक्तियां रद होंगी और टीडीपीएल से जुड़ी एक दर्जन परीक्षाएं भी रद की जाएंगी। मंगल मुद्दा में पढ़ें, इस फैसले से 7 लाख अभ्यर्थी प्रभावित होंगे और राज्य में बड़े पैमाने पर कानूनी विवाद व विरोध प्रदर्शनों की आशंका है।

रांची में आंदोलनकारी छात्रों में जश्न काा माहौल।

रांची में आंदोलनकारी छात्रों में जश्न काा माहौल।

HighLights

  1. जेएसएससी-सीजीएल की 1932 नियुक्तियां रद्द करने की प्रशासनिक तैयारी।

  2. टीडीपीएल से जुड़ी लगभग एक दर्जन परीक्षाएं भी रद्द होंगी।

  3. कुल 7 लाख अभ्यर्थी और नियुक्त कर्मचारी होंगे सीधे प्रभावित।

राज्य ब्यरो, रांची। झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल के जरिए हुई लगभग 1,932 नियुक्तियों को रद्द करने की प्रशासनिक तैयारी और टीडीपीएल से जुड़ी करीब एक दर्जन परीक्षाएं रद्द होने से राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश में बड़े पैमाने पर कानूनी विवाद और विरोध प्रदर्शनों के आसार बन गए हैं।

कल सीएम हेमंत सोरेन की घोषणा के बाद अब कार्मिक विभाग सीजीएल से हुई नियुक्ति को रद करने का अधिसूचना जारी करेगा। इसी के साथ संबंधित विभागों को नियुक्ति रद करने का आदेश जारी करेगा। हालांकि इससे पहले सरकार विधिक राय भी ले सकती है

नियुक्त एवं कार्यरत कर्मी इसके विरोध में आंदोलन कर सकते हैं। सरकार के विरुद्ध उनका उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करना तय है। सीजीएल के माध्यम से 1932 लगभग पदों पर नियुक्ति हुई है, जिनकी नौकरी खत्म हो सकती है।

टीडीपीएल से जुड़ी लगभग एक दर्जन परीक्षाएं रद होने से लगभग सात लाख अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। इनमें लगभग एक हजार अभ्यर्थी ऐसे भी होंगे जो विभिन्न पदों पर नियुक्त हो चुके हैं। आंदोलन में जहां हजारों अभ्यथियों और लाखों छात्र परिक्षाओं में सुधार काे आशान्वित हैं, वहीं नौकरी कर रहे युवकों को सड़क पर आने का खतरा दिख रहा है। 

ये नौ परीक्षाएं भी हो सकती हैं रद, फिलहाल हैं स्थगित

- सिविल जज जूनियर डिविजन (लिखित) परीक्षा : पद 138
- सहायक लोक अभियोजक (बैकलाग) लिखित परीक्षा : पद 26
- कारखाना निरीक्षक लिखित परीक्षा : पद 14
- प्रोजेक्ट मैनेजर लिखित परीक्षा : पद 30
- सहायक लोक अभियोजक (नियमित) लिखित परीक्षा : 134
- वाष्पित्र निरीक्षक : 05

प्रभाव और आंकड़े

  • बेरोजगारी और अनिश्चितता: सीजीएल नियुक्तियों के रद्द होने से लगभग 1,932 परिवारों पर सीधा संकट आएगा, वहीं टीडीपीएल (TDPL) से जुड़ी परीक्षाएं रद्द होने से लगभग 7 लाख अभ्यर्थी प्रभावित होंगे।
  • भविष्य की कानूनी लड़ाई: यदि सरकार नियुक्तियां रद्द करती है, तो प्रभावित कर्मियों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर करना तय है। इसके साथ ही कर्मचारी संघों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की पूरी संभावना है।

जेपीएससी और जेएसएससी की कुल 15 भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा है टीडीपीएल

आंदोलनकारी छात्रों ने बताया कि टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी टीडीपीएल ने झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की कुल 15 महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा परीक्षा कार्य संभाला था।

जिसमें जेपीएससी की 10 और जेएसएससी की 5 परीक्षाएं शामिल हैं। उन्होंने जानकारी देते कहा कि जेएसएससी ने कहा है कि 20 मई 2025 को टीडीपीएल को अपने सभी कार्यों से मुक्त कर दिया गया था, इसलिए उसके बाद हुई जेएसएससी परीक्षाओं में टीडीपीएल की भूमिका नहीं थी।

क्र. जेपीएससी की परीक्षाएं क्र. जेएसएससी की परीक्षाएं
1 संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा (नियमित) 1 जेजीजीएलसीसीई – झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा
2 संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा (बैकलॉग) 2 तकनीकी/विशिष्ट योग्यताधारी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा
3 संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) 3 फील्ड वर्कर प्रतियोगिता परीक्षा
4 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) 4 फॉरेस्ट गार्ड प्रतियोगिता परीक्षा
5 असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (एपीपी) – बैकलॉग 5 पीजीटी शिक्षक भर्ती परीक्षा
6 इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज    
7 प्रोजेक्ट मैनेजर    
8 असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (एपीपी) – नियमित    
9 बॉयलर इंस्पेक्टर    
10 झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट (जेट)    

संभावित चुनौतियां और सरकार के विकल्प

विधिक राय: सरकार द्वारा कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले महाधिवक्ता या विधि विभाग से राय लेना अनिवार्य है, ताकि अदालत में सरकार का पक्ष मजबूत रहे।

भविष्य की कार्ययोजना: बार-बार परीक्षाएं रद्द होने से राज्य की छवि और आयोग (JSSC/JPSC) की साख पर असर पड़ता है। सरकार को चाहिए कि वह भविष्य की परीक्षाओं के लिए एक पारदर्शी और फूल-प्रूफ नीति बनाए ताकि बार-बार कानूनी अड़चनें न आएं।

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