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    झारखंड में साक्षरता मिशन को बड़ी सफलता, FLNAT में 93% से अधिक शिक्षार्थी पास; महिलाओं में 'उल्लास'

    Updated: Thu, 09 Apr 2026 01:38 PM (IST)

    झारखंड में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (उल्लास) के तहत आयोजित बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक मूल्यांकन (FLNAT) परीक्षा में 93.33% शिक्षार्थी सफल हुए ह ...और पढ़ें

    झारखंड में साक्षरता मिशन को मिली बड़ी सफलता।

    झारखंड में साक्षरता मिशन को मिली बड़ी सफलता।

    HighLights

    1. उल्लास कार्यक्रम के तहत एनआइओएस ने जारी किया परिणाम।

    2. 15 वर्ष से ऊपर के आयु के लोगों के लिए आयोजित हुई थी परीक्षा।

    3. सफल शिक्षार्थियों को मिलेगा तीसरी कक्षा स्तर का प्रमाणपत्र।

    राज्य ब्यूरो, रांची। नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (उल्लास) के तहत आयोजित बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक मूल्यांकन (एफएलएनएटी) परीक्षा में 93.33 प्रतिशत शिक्षार्थी सफल घोषित किए गए हैं।

    राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआइओएस) द्वारा यह परीक्षा पिछले वर्ष सितंबर माह में झारखंड में आयोजित की गई थी, जिसमें उल्लास कार्यक्रम के तहत पंजीकृत 15 वर्ष से अधिक आयु के वैसे लोग सम्मिलित हुए थे, जो इस कार्यक्रम से जुड़ने से पहले निरक्षर थे।

    इन्हें अब तीसरी कक्षा स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण होने का प्रमाणपत्र मिलेगा और ये साक्षर माने जाएंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को पत्र लिखकर जारी परिणाम की जानकारी देते हुए निर्धारित प्रारुप में उनके बीच प्रमाणपत्र वितरण सुनिश्चित करने को कहा है।

    एनआइओएस की इस परीक्षा में कुल 3,39,904 शिक्षार्थी सम्मिलित हुए थे, जिनमें 3,17,244 सफल घोषित हुए। शामिल शिक्षार्थियों में 2,54,959 महिलाएं थीं, जिनमें 2,37,546 सफल हुईं। वहीं, इसमें 84,945 पुरुष सम्मिलित हुए थे, जिनमें 79,698 सफल हुए।

    पुरुषों की सफलता दर 93.82 प्रतिशत तथा महिलाओं की 93.17 प्रतिशत रही। हालांकि इस परीक्षा में पुरुषों से काफी अधिक महिलाएं सम्मिलित हुई थीं। उल्लास कार्यक्रम के तहत यह परीक्षा प्रत्येक वर्ष मार्च तथा सितंबर माह में आयोजित होती है।

    इस वर्ष की मार्च की परीक्षा भी संपन्न हो चुकी है, जिसका परिणाम आना बाकी है। इस मूल्यांकन में तीन विषय सम्मिलित होते हैं-पढ़ना, लिखना और गणित की बुनियादी जानकारी। प्रत्येक विषय 50 अंकों का होता है।

    इस तरह, कुल 150 अंकों की परीक्षा होती है।बताते चलें कि उल्लास कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 तक पूर्ण साक्षर का लक्ष्य रखा है। दो-तीन राज्यों ने लक्ष्य को प्राप्त कर ली है।

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