झारखंड में SIR पर असम-बंगाल जैसी राजनीति नहीं, सभी पार्टियां कर रहीं चुनाव आयोग का सहयोग
झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में राजनीतिक दलों का सहयोग मिल रहा है, असम और बंगाल जैसी बयानबाजी नहीं। ...और पढ़ें

झारखंड में एसआईआर। फाइल फोटो
HighLights
झारखंड SIR में राजनीतिक दलों का मिल रहा सहयोग।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मतदाताओं से की अपील।
90% गणना प्रपत्र वितरित, 30% हुए डिजिटाइज्ड।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की जगह उनका सहयोग ही मिल रहा है। असम और बंगाल में SIR के दौरान जिस तरह की राजनीतिक बयानबाजी हुई थी, उस तरह की स्थिति झारखंड में अभी तक नहीं बनी है।
यहां सभी राजनीतिक दल मतदाताओं से SIR में सम्मिलित होने की अपील कर रहे हैं, ताकि मतदाता सूची में सम्मिलित होने से कोई मतदाता वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक्स पर लिखकर मतदाताओं से SIR की प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की। इसका भी व्यापक असर हुआ। उन्होंने एवं उनकी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन ने भी स्वयं गणना प्रपत्र भरकर सभी मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरने का आह्वान किया।
विभिन्न राजनीतिक दलों की बात करें तो इसमें सबसे अधिक सक्रिय झामुमो रहा। झामुमो ने SIR की कई प्रक्रियाओं पर सवाल भी उठाए, लेकिन उसके सारे सवाल शंकाओं के समाधान को लेकर थे।
पार्टी ने तीन-चार बार राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर बिंदुवार सवाल उठाते हुए उन पर स्पष्टीकरण जारी करने का अनुरोध किया।
सबसे बड़ी बात यह है कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने भी उन पर संज्ञान लेते हुए सारी शंकाओं का समाधान किया। इसका लाभ उन मतदाताओं को मिला, जिनके मन भी उस तरह की शंकाएं थीं।
शंकाओं के समाधान से सही जानकारी मतदाताओं तक पहुंच पाई। बीएलए-2 की नियुक्ति में भी लगभग सभी बड़े राजनीतिक दलों ने पूरी सक्रियता दिखाई है। हालांकि सबसे अधिक भाजपा ने बीएलए-2 की नियुक्ति की है।
प्रारूप प्रकाशन के बाद शुरू हो सकता है आरोप-प्रत्यारोप
वर्तमान में SIR के तहत गणना चरण चल रहा है। इसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र दे रहे हैं तथा भरे हुए तथा हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र वापस लेकर उसे डिजिटलाइज्ड कर रहे हैं।
यह प्रक्रिया 29 जुलाई तक चलेगी। इसके बाद पांच अगस्त को प्रारुप मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। संभावना जताई जा रही है कि किसी विधानसभा क्षेत्र या मतदान केंद्र पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम नहीं होने पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो सकता है।
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90 प्रतिशत मतदाताओं को मिले गणना प्रपत्र, 30 प्रतिशत के डिजिटलाइज्ड
राजनीतिक दलों के सहयोग के कारण ही 90 प्रतिशत मतदाताओं के बीच गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं। वहीं, 30 प्रतिशत मतदाताओं के भरे हुए तथा हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र लेकर उन्हें डिजिटलाइज्ड कर दिया गया है। कुल 80,07,304 मतदाताओं के गणना प्रपत्र डिजिटलाइज्ड कर दिए गए हैं।