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    गंभीर बीमारी में बिना अप्रूवल शुरू होगा इलाज, झारखंड सरकार और टाटा एआईजी के बीच एमओयू

    Updated: Wed, 22 Apr 2026 08:02 PM (IST)

    झारखंड राज्य कर्मियों की स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए Tata AIG को फिर से चुना गया है। इस नई व्यवस्था में बड़े अस्पतालों को सूचीबद्ध करना, गंभीर मरीजों ...और पढ़ें

    झारखंड राज्य कर्मियों का स्वास्थ्य बीमा अब टाटा एआईजी से ही।

    झारखंड राज्य कर्मियों का स्वास्थ्य बीमा अब टाटा एआईजी से ही।

    HighLights

    1. टाटा एआईजी का स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए पुनः चयन।

    2. गंभीर मरीजों का इलाज बिना प्री-ऑथराइजेशन के तुरंत शुरू होगा।

    3. आयुष पद्धतियों में भी सीजीएचएस दर पर इलाज संभव।

    राज्य ब्यूरो, रांची। बदले पैटर्न में लागू हो रही राज्य कर्मियों की स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत टाटा एआईजी से कर्मियों और उनके आश्रितों का बीमा होगा। झारखंड राज्य आरोग्य सोसाइटी द्वारा आमंत्रित किए गए टेंडर में दोबारा इस बीमा कंपनी का चयन हुआ है।

    गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की उपस्थिति में साेसाइटी और बीमा कंपनी के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होगा। टेंडर में सबसे कम प्रीमियम कोट किए जाने के कारण इस कंपनी का चयन एक वर्ष के लिए हुआ है। इससे पहले टाटा एआइजी की एक वर्ष की सीमा फरवरी माह में ही खत्म हो गई थी।

    योजना में लागू नई व्यवस्था के तहत बीमा कंपनी को देश के कुछ चुनिंदा बड़े अस्पतालों का सूचीबद्ध किया जाना अनिवार्य होगा। साथ ही घायल एवं अत्यंत गंभीर मरीजों का इलाज सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना सत्यापन (प्री-आथराइज़ेशन अप्रूवल) का इंतजार किए बिना इलाज तुरंत शुरू हो जाएगा।

    ऐसे मामलों के लिए प्री-ऑथराइज़ेशन इंश्योरेंस कंपनी को रिक्वेस्ट फॉर ऑथराइजेशन लेटर मिलने के पांच घंटे के अंदर पूरा करना होगा। किसी भी हालत में इलाज में देरी नहीं होगी। बीमित कर्मी या उनके आश्रित आयुष पद्धति में भी इलाज करा सकेंगे।

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    इनमें आयुर्वेद, योग और नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, और होम्योपैथी सम्मिलित हैं। इन आयुष पद्धतियों में आईपीडी तथा ओपीडी दोनों में बीमित लाभुकों का इलाज सीजीएचएस दर पर होगा। बता दें कि अब इस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बीमित लाभुकों का इलाज सीजीएचएस दर पर किया जाएगा।

    इसके तहत सामान्य बीमारियों में पांच लाख तथा गंभीर बीमारियों में 10 लाख रुपये तक का भुगतान बीमा कंपनी करेगी। इससे अधिक खर्च होने पर भुगतान कार्पस फंड से किया जाएगा। 20 लाख रुपये से अधिक की स्वीकृति निर्धारित समिति द्वारा दी जाएगी।

    30 दिनों तक फालोअप का भी मिलेगा खर्च

    नन क्रिटिकल एवं क्रिटिकल दोनों बीमारी की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने से पहले पंद्रह दिन और भर्ती होने के बाद 30) दिन का खर्च, जिसमें ओपीडी, फालो-अप, जांच चार्ज, कंसल्टेंसी फीस और दवा का खर्च का भुगतान भी बीमा कंपनी करेगी।

    राज्य कर्मियों को छह हजार ही देना है प्रीमियम

    योजना में व्यापक बदलाव किए जाने के बाद भी राज्य कर्मियों को प्रीमियम का भुगतान अधिक नहीं करना होगा। उन्हें पूर्व की तरह छह हजार रुपये ही प्रीमियम के रूप में देने होंगे।

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